ऐसा पहले कभी नहीं था,जैसे आज है बॉलीवुड।
कितना था आदर्श चरित्र,हीरो हीरोइन सभी गुड।
जिनके काम को देखा है,वे सब अभिनेता थे गुड।
आज नशा में चूर दिखा है,ज्यादातर ये बॉलीवुड।
नाम किया बदनाम स्वयं का,नजरों से उतर रहे हैं।
हैस हशीस कोकीन ,सीबीडी आयल में तैर रहे हैं।
सुन कर है दुःख होता,किस रस्ते हैं चल पड़े सभी।
ये कैसी सीख दे रहे हैं, आने वाली पीढ़ी को सभी।
उड़ता पंजाब बनाया है,उड़ रहा समूचा बॉलीवुड।
ऐसा क्या इस धुएं में है,ये मकड़जाल ही वेरी गुड।
कुछ तो इस पर सोचें,समझें इसका वहिष्कार करें।
किया है अब तक गलती, तो उसको स्वीकार करें।
नशा पाप का सूचक है,व यह अपराधों का मूल है।
इससे कोई मजा है मिलता,  यही समझना भूल है।
कुछ ही देशों ने है फैलाया,सब से गन्दा व्यापार है।
युवा पीढ़ियां इसमें फंसती,हो रही रोज शिकार है।
भारत कमजोर बनाने का,दुश्मन देश की चाल है।
होगा नशा काफ़ूर सभी ,जितना बड़ा भी जाल है।
फ़ैल रहा है गवा जैसे,नेनुआ तरोई करेला लौकी।
एक जगह बीजो इसे तो,तेजी से पकड़ ले डौकी।
खून चूस लेता है,नशे की आदत जो पड़ जाती है।
ड्रगेटिक्स बना देता है,ड्रग बिना नींद ना आती है।
हीरो-हिरोइन या प्रोड्यूसर,या कोई हो डायरेक्टर।
विलेन हो या साइड हीरो,चाहे कोई भी हो एक्टर।
सब नशे के गिरफ्त में हैं,रहें नशे में ज्यादातर चूर।
व्हाट्सएप के चैट बताते,होंगे सब अब चकनाचूर।
इसीमें सबकी दिखे भलाई,सच से पर्दा तो खोलो।
क्या क्या छुपा रखा राज है, मुँह से खुद ही बोलो।
इसको रोको छोड़ो यारों,मिल सब बहिष्कार करें। 
गलत था जो अब न हो,सब अपना परिष्कार करें।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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