बनाना एक आशियाना, ख्वाब है सुंदर सभी का।
नफरत में नहीं करें बर्बाद, आशियाना हम किसी का।।
बनाना एक आशियाना————-।।
बनाती है अपना निवास, नन्ही चींटी कण कण बुनकर।
बनाता है नीड़ अपना, पंछी टुकड़े टुकड़े लकड़ी चुनकर।।
सीखे हम भी जीना इनसे, जिंदगी है नाम इसी का।
नफरत में नहीं करें बर्बाद, आशियाना हम किसी का।।
बनाना एक आशियाना———–।।
कैसा भी हो मौसम, वह खूब खून- पसीना बहाता है।लेकिन फिर भी मुश्किल से,परिवार का पेट वह भरता है।।
खुश है बनाकर झौपड़ी वह, महल है यही उसी का।
नफरत में नहीं करें बर्बाद, आशियाना हम किसी का।।
बनाना एक आशियाना————-।।
एक कर्ज है हम सब पर, हम सबको वह चुकाना है।
जिसकी गोदी में खेले हैं हम, जन्नत उसको बनाना है।।
यह वतन और यह चमन, आशियाना है हम सभी का।
नफरत में नहीं करें बर्बाद, आशियाना हम किसी का।।
बनाना एक आशियाना————।।
रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
