जब कभी मुहब्बत में मेरा  नाम आयेगा
तब आख़िरी अदालत में तेरा नाम
 जाएगा।
तेरी याद में जब कभी मैं रोती हुं,
तब   खुदा के पास मेरा पैग़ाम 
जाएगा    ।
तेरे प्यार के  सहारे जी लेती,
 सारी उम्र।
पर तुने जीने ना दिया ये खबर
आख़िरी अदालत में  पहली बार
जायेगी।
जब- जब मेरे दिल से आह निकलेगी,
उसकी दुआ सदा ख़ुदा के 
पास जाएगी।
तुम अगर साथ देने का ,‌वादा
किया होता तो शायद आज ,
मेरी बारात  तेरे अरमानों
के साथ जाती।
गर तू मेरे आंखों में बसे प्रेम के,
 जज्बातों को पढ़  लेता।
तो मेरी जिंदगी की राह में
 तेरा साथ होता।
तु डर उस खुदा के फैसले से,
उसका फैसला आख़िरी बार
करते हैं
आख़िरी अदालत खुदा की अदालत है
चलो दोनों की फरियाद उसके पास करते हैं।
अर्चना पांडेय”आर्ची
गोरखपुर
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