विविधता में एकता बहुत ही सुंदर कथ्य है,जो एक समाज के रहने वाले विभिन्न लोगों के समूह मध्य दृष्टिगोचर होने वाले एकात्म भाव को प्रदर्शित करता है। यद्यपि उनमें भिन्न-भिन्न प्रकार का वैविध्य देखने में आता है जैसे कि खान-पान, रहन-सहन, बोल चाल में, भाषा और विचार संबंधी तथा,धर्म, जाति,सम्प्रदाय संबंधी तथापि वे एक ही क्षेत्र, देश काल और स्थान पर मिलजुल कर एक दूसरे के साथ सौहार्द पूर्ण ढंग से सभी को सम्मानित तरीके से आत्मसात करते हुए एकता का भाव प्रदर्शित करते हुए रहते हैं।
ऐसा ही अद्भुत दृश्य हमारे देश भारतवर्ष में चहुँओर दिखाई देता है तभी तो उसे समग्र विश्व मे अनेकता मे एकता/ विविधता मे एकता की मिसाल के तौर पर उद्धृत किया जाता है। यह विशेषता कोई छोटी मोटी विशेषता नहीं है।
भारत में “विविधता में एकता” की प्रसिद्ध अवधारणा बिल्कुल सटीक बैठती है। “विविधता में एकता” का अर्थ है अनेकता में एकता। कई वर्षों से इस अवधारणा को साबित करने वाला भारत एक श्रेष्ठ देश है । भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर “विविधता में एकता” देखने के लिये ये बहुत स्पष्ट है क्योंकि अपने धर्म के लिये एक-दूसरे की भावनाओं और भरोसे को बिना आहत किये कई कई धर्मों, नस्लों, संस्कृतियों, और परंपराओं के लोगों का एक साथ रहते हैं।
स्वतंत्रता के समय से भारत में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर बहुत बदलाव हुए हैं लेकिन एक बात जो अब तक बरकरार है वह है उसकी ”विविधता में एकता”। हम सभी जानते हैं सांस्कृतिक और सामाजिक समस्याओं को हल करने में एकता सबसे प्रभावशाली कारक है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेदों के बावजूद लोगों के बीच आपसी सम्मान की भावना जगाती है। भारत बहु-सांस्कृतिक प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है इसलिए लोग शांति और सामंजस्य के साथ आपस में एक साथ रहते हैं।
भारत एक रंगीन देश है जहाँ लोग विभिन्न धर्मों में विश्वास करते हैं, विभिन्न परंपराओं, संस्कृति, अपने व्यक्तिगत विश्वास और जीवन शैली का पालन करते हैं फिर भी वे एक दूसरे के त्योहार इकट्ठे मनाते हैं। जहाँ गणेश चतुर्थी को पश्चिम भारत में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है वहीं दिवाली, होली उत्तर भारत के मुख्य आकर्षण हैं। नवरात्र गुजरात का दिल है तो जन्माष्टमी उत्तर प्रदेश की आत्मा है। इन कारणों की ही वजह से विदेशी पर्यटक भारत की ओर आकर्षित होते हैं और विशेष रूप से होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस, लोहड़ी आदि के दौरान भारत की यात्रा करते हैं। भारत में सबसे पुरानी सभ्यता और संस्कृति है और इनमें से कुछ तो आज भी प्रचलित हैं। हालाँकि भारत में विविध और मिश्रित संस्कृतियों की कोई कमी नहीं है फिर भी यह प्रसिद्ध नारा ‘विविधता में एकता’ का ज्वलंत उदाहरण हमारा परम प्रिय देश भारतवर्ष ही है,तभी तो हम पूरे सुर-ताल से, गर्व के साथ गाते हैं- “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा,हम बुलबुले हैं इसके ये गुलिस्ताँ हमारा।”
जयहिंद! जय भारत!
लेखिका –
सुषमा श्रीवास्तव
उत्तराखंड।
