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मेरी किस्मत की किताब में क्या लिखा है पता नहीं है
कभी लगता है बहुत कुछ पालिया अब कुछ खोना नहीं है
कभी कभी लगता सब कुछ खो दिया अभी कुछ पाया ही नहीं है
कैसी पहेली है ये मेरी किस्मत का खेल जो अभीतक सुलझा नहीं…!!
कभी अपनों की हज़ारो भीड़ में हंसाता है
तो कभी गम की घेरो में उलझा देता है
जो कभी खुल कर हँस लिया करते थे
तो कभी मुस्कुराना भी मज़बूरी होजाता है
ये कैसी पहेली है ये किस्मत मेरी जो अभीतक कोई समझा नहीं..!!
जब भी तन्हा होती हूँ बस यही सोचती रहती हूँ
काश हमेशा अपनों की साथ सबको नसीब होता
किसी की भी ज़िन्दगी में किसी को खोने का गम ना कोई गम होता
क्यूँ एक पल ज़िन्दगी बदल जाती है,जो सबसे ख़ास होता है वही हमसे दूर होता है..?
किसने बनायीं है किस्मत जो कभी किसी के साथ निभाता नहीं..!!
आजतक मुझ पर जो बिता मैंने तेरे लिखा मान स्वीकार किया
अपनी खुशियाँ कुर्बान की अपनों के लिए हँस कर गम को स्वीकार किया
एक अरसे बाद फिर एक खुशी की किरण दिखा है मुझे
उसे मेरी हाथो की लकीरो में लिख दे, बस यही दुआ में सर झुकाई है
अब तो कोई जवाब मिल जायें नैना को, कोई कह दे तेरे किस्मत तुझसे जुदा नहीं..!!
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नैना…✍️✍️💞
