प्राणियों की रक्षा को
जो डट कर हर दिन खड़े रहे…
बन योद्धा हर वार
पर करते रहे प्रहार…
भय की आशंका से मुक्त
प्राणों की रक्षा करते रहे…
उद्देश्य कल्याण मानव मात्र का
हृदय में साधे चलते रहे…
जीवनदान प्रदान करते सबको
स्वयं काल के गाल में समाये…
रिश्तों को सब अपने भुला
अश्रु जन के चुनते रहे…
पलभर ना लिया विश्राम
अनवरत सेवा में जूटे रहे…
गंभीरता काल की समझ
दुर्गम राहों पर चलते रहे…
दुसाध्य घड़ियों में भी
जिनके पाँव नहीं रुके…
वेदना की पुकार सुन
पीड़ा को हरते चले…
वीर योद्धाओं ने रणभूमि में
प्राण तक गवा दिए…
नमन इन कोरोना योद्धाओं को
अमर सदा के लिए जो ये हो लिए…
स्वरचित 
शैली भागवत ‘आस’
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