सुनो जरा, वह कह रहा है…..
खर्च जोड़ने,बीमार माँ,उपचार भी नहीं लेती,
तब कहीं जा बेटा उसका पढ़ रहा है
सुनो जरा, वह कह रहा है …….l
छोटी सी दम घोंटू कोठरी,
श्वसन हेतु भी असक्षम सी,
अंधकार में जलते,झिलमिलाते,
नन्हें जुगनूं सी रौशनी में भी,
रट पुस्तकें रोजगार समर में
बिन रुके, थके, डट रहा हैl
सुनो जरा , वह कह रहा है…….
अर्थाभाव से बना बेटिकट,
रैन कटे बिछा चादर प्लेटफॉर्मों पर,
भूक प्यास से आकुल- व्याकुल,
अनगनित परिक्षाएं दे -देकर
संपूर्ण भारत भ्रमण कर रहा हैl
सुनो जरा, वह कह रहा है…….
है भरोसा उसपर कितनों का,
कितनों का विश्वास लिए,
करने अपने, अपनों के पूरे सपने,
अभाव, असफलता, अथक परिश्रम की अग्नि में
स्वर्ण दीप्ति लिए तप रहा है l
सुनो जरा, वह कह रहा है…..
पेपर लीक, भर्ती स्कैम् की ठोकर खाकर भी,
धीर ,वीर, गंभीर खड़ा,
एक दिन तो बन हीरे सा ,
जा सकता है कहीं भी जड़ा,
नये अवसर की तैयारी में
अध्ययन के नये तरीके गढ़ रहा हैl
सुनो जरा, वह कह रहा है….
रोजगार के सवालों से बचते- बचाते,
बेरोजगारी के उपहासों से कतराते,
हर नयी भर्ती से आँख मिलाते,
अनियमितताओं के विरुद्ध आवाज उठाते
नये रूप में ढल रहा हैl
सुनो जरा, वह कह रहा है…..l
चुल्हें- चक्की चले न चुनावों से,
रोज उन्हें रोजगार जलाता,
फिर क्यों एक पाबंद समय का,
दूजा, भेंट घोटालों की चढ़ता कभी,
या फिर हमेशा टाला जाता,
कर्मवीर कस कमर खड़ा अब
पूछने यह प्रश्न चला है l
सुनो जरा, वह कह रहा है….. I
– निगम झा
सशस्त्र सीमा बल
सिलीगुड़ी
