छोटी छोटी आशाओं में जीना सीखें।
महत्वाकांक्षाएं घटा कर जीना सीखें।
जन्म मिले तो जीने की छोटी आशा।
मतलब भर पढ़लिख लेने की आशा।
रोजगार से लगने की है छोटी आशा।
निज घर बसने की रखें छोटी आशा।
प्रभु पत्नी की गोद भरे की है आशा।
घर में बच्चे खेलें कूदें है छोटी आशा।
हर इच्छा जो अपनी छोटी सी आशा।
जीवन ढंग से बीत जाए छोटी आशा।
अपनी जरूरतें पूरी हो सकें ये आशा।
मानव को रहती ही ऐसी छोटी आशा।
इंसा को सुख मिले जभी छोटीआशा।
छोटी-2 आशाओं की ही हो प्रत्याशा।
ईश्वर सब की पूरी करते छोटी आशा।
कर्म करें तो फल की रखें नहीं आशा।
मिलेगा मीठा फल होगी नहीं निराशा।
बस एक यही अपनी छोटी सी आशा।
छोटी-2 आशाओं से भरी एक आशा।
ऐसे ही जीवन काटें रखें छोटी आशा।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
