नहीं रह गया अस्तित्व उसका दुनिया मे
जो भी इस मोहब्बत के महफ़िल से गुज़रे
मिट गए खुद का पहचान ज़िन्दगी से उनका
कोई दीवाना तो कोई इश्क़ मे फ़नाह होगए
नींद गवा कर रातो के गहराई मे जागे रहना
चाँद के चाह मे ऊन सितारों से दोस्ताना होगए
सपनो का ख्वाहिश किसे रहा अब आशिक़ी मे
महबूब नहीं तो यहाँ मौत के कयी हमनवा होगए
होठों की मुस्कुराहट पे हर कोई फ़िदा होता हैं
सच्चे दीवाने इश्क़ मे कयी ख़ामोशीयों मे खोगए
फर्क नहीं पढ़ता कोई अपना कौन पराया ज़िन्दगी मे
महफिल के ख्वाहिश मे इश्क़ मे सभी तन्हा होगए
किसी एक का नहीं सारी दुनिया का यही दाँस्ता हैं
ज़िन्दगी सज़ा बनी किसीके तो कयी मयखाने के होगए
सारी उमर इंतजार रहा लौट आने का महबूब की
क्या बीते दिल पर जो खबर आयी वो किसी गैर के होगए
छोड़कर ज़िन्दगी का फिकर इंतजार मौत का करते हैं
देखते हैं कबतक सताता हैं वो जिसके नाम हम होगए
कोई गिला नहीं होठों पर ना शिकायत इस दिल को हैं
फिर भी उन्हें क्यूँ लगता हैं नाजाने की हम खुदगर्ज होगए
दुनिया के भीड़ से दूर बैठे थे हम किनारे समुन्द्र के
कुछ राहत मिले ज़ख्मो से ये भी दिलके वहम होगए
हँसते हुए कह गया मौजी लहरों की कुछ अफसाने
तुम हीं नहीं “नैना” इश्क़ मे लाखो समुद्र के पहरेदार होगए….!!
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नैना…. ✍️✍️✍️
