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हम इंसान की ज़िन्दगी मे
सबसे बड़ी पुण्य का काम
ज़िन्दगी मे दान करना होता है
कहते है की दान करने से
जीवन की हर पाप व दुःख नष्ट होती है
इंसान यश की प्राप्ति करता है
पर सवाल ये है की
सबसे बड़ी दान कौन सा है
जिससे मानव जाती का उद्धार होजाता है
इंसान इसी धरती पर
हर पाप से मुक्त होजाते है
क्या वो अन्नदान है, या वस्त्र दान
कोई भूमि का दान करने से पुण्य मिलता है
या द्रव्य, सोना चानी जैसे आभूषण
जी नहीं ये सब तो ससीर सुख की चीज़े होते है
इससे कुछ पल तो खुशी मिलेगी
पर जीवन की सही उद्देश्य पूरा नहीं होता है
इंसान कलयुग की बन्धन से
मुक्त नहीं होपाता है इस जीवन मे
ज़ब तक अपने हाथो से
सच्चे दिल से कन्यादान न कर दें
कन्यादान मनुष्य की सबसे बड़ी पुण्य का काम होता है
एक माता पिता के जीवन की
सम्पूर्ण खुशी व माता पिता होने की अहसास होता है
इसीलिए शायद कहाँ जाता है की
ज़ब तक किसी ने कोई कन्यादान न किया हो
संसार मे आने की उद्देश्य अधूरा रहता है
ज़िन्दगी मे जितना भी पुण्य का काम किया हो
या पूजा या यज्ञ की हो उनका फल नहीं मिलता
ज़ब तक कन्यादान न किया हो
कोई धर्म की काम असफल रहता है
ज़िन्दगी मे ज़ब तक कोई माँ बाप
अपने पुरे जीवन बेटी की कन्यादान न कर दें
इसीलिए हम भारतीयों की
एक खूबसूरत सी बात होती है की
यदि किसी के अपनी बेटी नहीं होती
वो किसी की भी बेटियों को अपने गोद मे बिठाकर
संतोष से उनका कन्यादान करते है
जिसके चलते एक बेटी का घर बसता ही है
और दूसरा दो पिता और दो माँओ की
ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण लश्य पूरा होजाता है
जिससे उनकी सुकून की सांस लेती है
इसीलिए बेटियों को ज़िन्दगी का बोझ नहीं
जीवन की सही मुक्ति की वजह समझें 🙏
उन्हें पूरा प्यार व स्नेह लुटाये
क्योकि वो ताउम्र माता पिता के घर नहीं रहती
लेकिन ज़ब तक रहती है तब तक
घर परिवार को अपनी गुणों से
स्वर्ग की तरह सजाये रखती है
और घर से बिदा होते होते भी अपने कुल की मान
और माता पिता के हाथों
एक सर्वश्रेठ यज्ञ करवा जाती है
जिससे ईश्वर भी उन्हें हाथ जोड़ लेता है की
धन्य है वो माता पिता जिन्होंने ने
अपनी बेटी को कन्यादान दें दिया
एक ज़िन्दगी को दूसरे की ज़िन्दगी से जोड़ दिया
ये आसान नहीं होता है किसी के लिए भी
ये तो हर किसी को अहसास है….!!
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नैना… ✍️✍️
