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दिल मे अजनबी सी घबराहट
आँखों मे नये दुनिया की मे जाने की ख्वाब
कभी नहीं भूलते है ज़िन्दगी मे हम 
वो हमारे स्कूल का पहला दिन की बात
घर से ही कुछ उलझन मे निकली थीं
जाने कैसा होगा आज से ज़िन्दगी की शुरुआत
कुछ ना समझी और शरारत की खान लिए
स्कूल का पहला दिन मेरा जो गुज़रा था
एक हाथ मे कैंडी की पैकट लिए
दूसरे हाथ से पापा जी के ऊँगली चली थीं थाम
पहली बार था जो निकले थे घर से पुरे दिन के लिए
वो स्कूल का पहला दिन कुछ मायूस भी था
खुद के बराबर बहुत से बच्चो का एक साथ दिखना
कभी कोई चिढ़ाते तो किसी को हँसते हुए देखना
छोटे छोटे पैरो से अपने नये ज़िन्दगी के ओर बढ़ना
वो स्कूल का पहला दिन जीवन के लश्य का आगाज़ था
माँ की आँचल को छोड़ बिद्या की दामन थामा
घर की आँगन से दूर स्कूल के कम्पाउड मे कदम रखा
गली मोह्हले की खेल छोड़ किताबों से दोस्ती हुई
सच मे एक नयी ज़िन्दगी का शुरुआत स्कूल का पहला दिन था
क्या खूब सुन्दर संगम होता है स्कूल का पहला दिन
शून्य से ज़िन्दगी मे जाने कितने अंक मिल जाते है
एक नया पहचान बनता है संसार मे गुरु और शिष्य का
आज जो कुछ भी है हम ज़िन्दगी मे कभी न होते जो
वो स्कूल का पहला दिन हमारे ज़िन्दगी मे न होता….!!
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नैना…. ✍️✍️
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