यह जिंदगी कुछ भी नहीं है, तुम्हारे बिना।
किसी काम की नहीं ये खुशियां, तुम्हारे बिना।।
यह जिंदगी कुछ भी नहीं———–।।
हाल दिल का मैं , कैसे किसी को बताऊँ।
तेरे सिवा और किसी से, क्यों दिल लगाऊँ।।
मिलता नहीं चैन दिल को, तुम्हारे बिना।
यह जिंदगी कुछ भी नहीं———-।।
ख्वाब तो मैंने जीवन में, सजाये बहुत है।
जीवन में दोस्त तो मैंने, बनाये बहुत है।।
लेकिन नहीं होंगे ख्वाब पूरे, तुम्हारे बिना।
यह जिंदगी कुछ भी नहीं———-।।
तुमको ही तो सच मैंने, दिल में बसाया है।
तुम्हारे ही लिए तो , यह ताजमहल बनाया है।।
नहीं होंगे सितारें इसमें रोशन, तुम्हारे बिना।
यह जिंदगी कुछ भी नहीं———–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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