तेरे बिना यह जीवन मेरा, किस काम का मेरी मंजूबाला।
तेरे बिना यह संसार भी, किस काम का मेरी मंजूबाला।।
तेरे सिवा नहीं मतलब किसी से, तू ही मेरा प्यार है।
तेरे बिना यह मेरा सफर , किस काम का मेरी मंजूबाला।।
तेरे बिना यह जीवन मेरा———–।।
सुबह-शाम सिर्फ तुमको ही, करता हूँ याद हरदिन मैं।
सुंदर-हसीन तेरे ख्वाब ही, सच देखता हूँ हरदिन मैं।।
तेरे बिना नहीं रौनक कुछ, मेरे जीवन में मेरी मंजूबाला।
तेरे बिना यह मेरा सफर , किस काम का मेरी मंजूबाला।।
तेरे बिना यह जीवन मेरा———–।।
तू ही है मेरे होठों के नगमें, तू ही मेरे गीतों की सरगम।
तेरे हंसने से खिले गुल चमन में,तू ही है मेरी हमदम।।
तेरे बिना यह जन्नत जहां की, अधूरी है मेरी मंजूबाला।
तेरे बिना यह मेरा सफर, किस काम का मेरी मंजूबाला।।
तेरे बिना यह जीवन मेरा———-।।
करें हम रोशन सितारें जीवन में, मिलकर मेरे हमसफर।
करें याद संसार अपना प्यार, अपना मिलन मेरे हमसफर।।तेरे बिना मेरे जीवन की खुशियां, अधूरी है मेरी मंजूबाला।
तेरे बिना यह मेरा सफर , किस काम का मेरी मंजूबाला।।
तेरे बिना यह जीवन मेरा———–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
