क्यों बनती आँखें एक्स-रे मशीन,
सिर्फ बहू के कामों पर।
क्यों बेटी की शरारत मन को
प्रफुल्लित कर जाती है।।
क्यों बहू के गलती पर आए गुस्सा।
बेटी की गलती नज़रंदाज़  कर दी जाती है?
क्यों बेटी की जिद्द हक लगता है।
बहू की मांगें क्यों ठुकराई जाती।।
क्यों शौक़ अपने बच्चों का पूरा कर 
मन पुलकित हो जाता है।।
और बहू की जरूरत को भी,
अगली बार, कह कर टाला जाता है।
क्यों आँखें बनती है एक्सरे मशीन,
सिर्फ बहू के ही व्यवहारों पर।
क्यों बेटी की चंचलता मन में,
उर्जा का संचार भर जाती है।।
क्यों उठाते हैं सवाल 
सिर्फ बहू के ही पहनावे पर।
पर बेटी क्यों? हर रूप में
प्यारी लगती है।।
बेटी क्यों होती है परी,
जो बहू नहीं बन पाती है।
क्यों? नारी सिर्फ नारी न रहती, 
दो पाटों के बीच पिस जाती है।।”
           अम्बिका झा ✍️
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