समझौता गमों से कर लो
ऐसे ही तुम आगे बढ़ लो..
सदा वो मिलता नहीं जो तुम चाहो
ख्वाहिशों को थोड़ा कम कर लो..
धूप न हो तो छाँव भी भाती नहीं
आसमां थोड़ा सही हासिल कर लो
चाहत और तकदीर साथ मिलती नहीं
एक तरफ बाँध कुछ किस्से रख लो..
ज़िन्दगी पर हक़ सबको मिला कहाँ
तुम इसे अपनी तरह बना कररख लो..
स्वरचित
शैली भागवत ‘आस’
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