समझौता समय से कर लो,समझौता समय से करना है। 
समय की चादर में गम भी आते हैं, खुशियाँ भी मिलतीं हैं, 
कभी शीत कभी ताप का एहसास होता है,
सबको मिलजुल कर जीना है, हाँ,समझौता करना है।
समय के पहिए तो, ऊपर ले जाते हैं, नीचे ले आते हैं। 
कभी दूर के स्वप्न दिखाते हैं, कभी निकट बुलाते हैं। 
कहीं मधु का प्याला है,कहीं कड़वा निवाला है,
समरस होकर जी लो,तो जीवन निराला है।
समझौता समय से कर लो,समझौते संग ही चलना है।
न गिरना है और न लुढ़कना है,
बस चढ़ते ही जाना है,बढ़ते ही जाना है।
लक्ष्य की खुशबू तक हमें पहुँच कर रहना है।
समझौते की डोर को विवेक से पकड़ना है।
कभी हार न खायेंगे, जीत कर आयेंगे।
तूफ़ाँ का झंझावात मिले या हो पतझड़ हो सूखा। 
बसंत बयार चलानी है,मधुमास मनाना है।
समझौता साहिल है तो किस बात का खौफ हमें ,
समझौते की पतवार से हर नौका पार ले जाना है।
जीवन का मतलब बस आना और जाना है।
रचयिता-
सुषमा श्रीवास्तव 
मौलिक कृति
सर्वाधिकार सुरक्षित 
उत्तराखंड।
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