जिंदगी आसान यदि कर लो,
अपने गमों से समझौता।
जिंदगी वीरान यदि ना करो,
अपने गमों से समझौता।
कह गए संत कवि रविदास,
चंगा मन तो गंगा है कठौता।
गमों को उकेरना बंद करें,
जीने का सूत्र है इकलौता।
गम लेना देना बंद कर लो तो,
नौबत न होगी कि करें समझौता।
-चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण
