जीवन में कभी कभी हड़ताल जरूरी होता है।
नौकरी व्यवसाय अनशन भी जरूरी होता है।।
नागरिकों का अहित न हो इसे रोकना जरूरी।
शासन सत्ता के खिलाफ हो हड़ताल जरूरी।।
जनमानस व संगठनों का हाथ बटाना जरूरी।
सरकारों की आँख खोलना हो जाता जरूरी।।
अपने जायज माँगों को रखना जब हो जरूरी।
बात करना आवाज उठाना हो जाता जरूरी।।
एक अकेला कुछ कर न सके संगठन में शक्ति।
तुम मेरी आवाज बनो मैं हुँकार भरूँ है शक्ति।।
*अभीतो ये अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है।*
*हमारी माँगें पूरी हो  चाहे जो मजबूरी हो।।*
एक जगह इकट्ठे होके अपना विरोध दर्शाते हैं।
अपने अहित को सोच-2 आक्रोश दिखाते हैं।।
भाषण देते हैं व नारा भी जोर शोर से लगाते हैं।
शासनसत्ता को मजबूर करें दम खूब लगाते हैं।।
सत्ता का अधिकारी आकर फिर ज्ञापन लेता है।
कुछ ना कुछ कराने का वह आश्वासन देता है।।
हड़ताली माँगों को शासन सत्ता तक पहुँचाते हैं।
प्रतिफल अच्छा मिलता है बात समझ जाते हैं।।
कभी-कभी सरकारों के सख्ती का फल मिलता।
माँगा जाता है पूत  मगर भतार ही उफर पड़ता।।
छात्र शिक्षक मजदूर नेता सभी करें यह हड़ताल।
यूनियनों और संगठनों के बल पर करें हड़ताल।।
कभी-कभी ये आम जनता भी करतीहै हड़ताल।
वर्षो रही किसानों ने की थी जो लम्बी हड़ताल।।
भारत की हड़तालों में सब काम काज ठप होता। 
आर्थिक नुकसान भी थोड़ा नहीं  बहुत है होता।।
जापानी हड़ताल में दुगुना काम वे हैं करते जाते।
उत्पादन बढ़ा देते हैं मालिक खपा नहीं हैं पाते ।।
माँगें पूरी करना मैनेजमेंट-सरकारों की मजबूरी।
कामकाजी लोगों की बढ़ा देतेहैं सैलरी मजदूरी।।
हरेक अनशन हड़ताल का कुछ घाटा व मुनाफा।
भारत में तो अनशन हड़ताल में होरहा इजाफा।।
हड़ताल वही अच्छी होती जो सार्थक हितकारी।
जिससे समाज का भला हो सके एवं सुखकारी।।
हड़ताल नहीं वह अच्छी होती जो हो हानिकारी।
तोड़ फोड़ आगजनी ना काम हो विध्वंशकारी।।
लोकतंत्र में सबको अपनी बातें रखने का हक है।
बेजा बातें व बेजा काम करने का ना ही हक है।।
संविधान ने हमें दिया है कुछ मौलिक अधिकार।
कानून हाथ में लेने का हमको नहीं है अधिकार।।
सोच समझ के काम करें व दिमाग का इस्तेमाल।
भड़कावे में न आएं किसीके न ही हों इस्तेमाल।।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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