जब से मिले हम दोनों संग…!
आ गया जीने का नया ढंग…!
मेरी हर सॉंस में नाम आपका…!
प्यार बस मिलता रहे आपका…!
कभी रही नहीं बिन आपके…!
सातों जन्म अब हूॅं साथ आपके…!
मेरे हृदय के स्पंदन में… आप!
रुधिर की हर तरंग में…आप!
सदा-सदा ही रहे साथ…मैं और आप!
जीवनसाथी मेरे…!
ओ! हमराही मेरे…!
संग चले हैं हम दोनों…!
चलना आगे भी!
रहना नहीं मुझे बिन आपके!
जीना नहीं मुझे बिन आपके!
©मनीषा अग्रवाल
मौलिक, स्वरचित
