मेरे आंगन में खड़ा है एक अमरूद का पेड़ 
नटखट, शरारती बड़ा है अमरूद का पेड़ 
आजकल बहारें उस पर टूट कर आयीं हैं 
अमरूदों की छटा ने घर में धूम मचाई है 
क्या बच्चे क्या बीवी, सब उसके दीवाने हैं 
उसके खट मिठ्ठे स्वभाव के हम भी परवाने हैं 
मेरी तरह थोड़ा नादान थोड़ा मनचला है 
पूरे आंगन में हो रहा उसी का हो हल्ला है 
आसपास की बेलों, कलियों को छेड़ता है 
कभी सीटी बजाता है तो कभी किसी को देखता है 
अंगूर की बेल से उसका टांका भिड़ गया है 
कुछ दिनों से उसका दिल उधर ही मुड़ गया है 
उसकी ये हरकत मौसमी को पसंद नहीं आई 
थाने जाकर वह पुलिस को साथ में ले आई 
बिना बात ही पुलिस उसे पकड़ कर ले गई 
मुहब्बत करने की सजा उसे भी मिल गई 
लगता है कि मुहब्बत का दुश्मन जमाना है 
क्या बताऊं यारों , शायद अब ऐसा ही जमाना है 
अमरूद तो चला गया पर महक आज भी जिंदा है 
नफरतों के बीच मुहब्बत आज बहुत शर्मिंदा है 
हरिशंकर गोयल “हरि”
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