तुम्हारी खुशियों के उजाले मेरे लिए न भी सही…
मैं रात अंधेरी में भी तुम्हारे लिए मैं जलती रहूँगी!
जब कोई न होगा साथ तुम्हारे…
मैं तब भी तुम्हें तकती रहूंगी.
जब तुम याद करो मुझको प्रिय …
नज़र भर देख लेना नज़र उठा कर
ढूंढ लेना मुझ तक अपना रस्ता…
बांध लेना अपने मन को मुझ से…
मेरे प्रेम की चमक से रोशन करना अपना जहान्…
सूरज न सही…
मैं हूँ तुम्हारी दुनिया का
आशा भरा ध्रुवतारा।
शालिनी अग्रवाल
जलंधर
