क्यों इतना हो गया मजबूर, घर की फिक्र नहीं होती।
यह शहर छोड़ जाने की,मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————।।
हुआ बदनाम भी यहाँ, हुआ बर्बाद भी यहाँ।
फिर भी दूर जाने की इससे, मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————।।
गुजरा हूँ उसकी गली से, बुलाया फिर भी नहीं उसने।
बेवफ़ा उससे हो जाऊं, मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————।।
ऑंसू उसके पिये हमने, जहर हमें उसने पिलाया।
खेल खत्म कर दूं उसका, मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————-।।
नहीं कोई खौफ वहाँ मुझको, नहीं कोई दोस्त यहाँ मेरा।
हटा दूँ ख्वाब से इसको, मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————-।।
हुआ हूँ जिससे मैं मकबूल,मोहब्बत ही इसकी वजह है।
याराना छोड़ दूँ इससे, मेरी इच्छा नहीं होती।।
क्यों इतना हो गया——————-।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
