सुमित को निचे भागते हुए आते देख विमला और कृष्णा(सुमित के पिता)पहले एक दूसरे को देखा फिर सुमित को देखते हुए संजय (सुमित के भईया)से..
कृष्णा -संजय बेटा
संजय -हाँ डैड बोलिए
कृष्णा -बेटा खुद के साथ न अपने भाई का भी ख्याल रखा कर, देख दिन पे दिन क्या हाल बनाते जारहा है। मैं पिता हूँ मुझसे कुछ कहना मुश्किल होगा। लेकिन तू भाई है पूछ सकता है और समझने के साथ समझाना भी तेरे लिए आसान है। संजय सोचते हुए
संजय -जी पापा हम बात करे गे भाई से इस बारे मे। वक़्त मिलते ही।
विमला -बेटा थोड़ा जल्दी ये वक़्त निकाल लेना। कहीं बहुत देर न होजाए। समझ रहा है न…?
संजय -हाँ माँ आप दोनों टेंशन मत लीजिए।जल्दी ही बात करुँगा इस बारे मे भाई से 😊
   तब तक जल्दी जल्दी सुमित डांनिंग टेबल पर बैठते हुए सबको गुडमॉर्निंग wish किया और संगीता से नाश्ता लगाने को कहाँ। तो संगीता सबको नाश्ता लगाने लगी। थोड़ी देर मे सुमित, मोहन और राज तीनो ऑफिस के लिए साथ ही हर रोज़ की तरह निकल पढ़े थे। जहाँ राज और मोहन अपने मस्ती की धुन मे रहते तो वही सुमित अपनी देवी की ख्यालों मे हर तरफ नज़रे घुमाते हुए जैसे हर जगह उसे ढूंढ रहा हो..।
                 दूसरी तरफ मुश्कान भी घर से निकल चुकी अपने एंजियो के लिए जहाँ वो अपने दो सहेलियों (आरती और राधिका )के साथ वहाँ के बच्चो को पढ़ाती थीं। वो घर से कुछ दूर पैदल चलकर जाने के बाद बस स्टैंड आता था वो वही बस पकड़ कर हर रोज़ जाती थीं। लेकिन आज ज्यादा देर होजाने के वजह से मोहित बस स्टैंड तक ड्राप करके गया था नहीं तो आख़री बस भी छूट जाता।मुश्कान कभी हाथ मे बँधी घड़ी देखते हुए तो कभी रोड पर बस को देखते हुए बेचैनी से खड़ी थीं।तभी कुछ देर से एक बस आती दिख जिससे उसके चहरे से उसी की तरह प्यारी सी मुश्कान खिल गयीं। वो अपनी बैग और टिफन को सँभालते हुए बस पे चढ़ गयीं। जैसे उसे दुनिया की कोई परवाह ही न हो की कोई उसे देख रहा है या कोई आगे पीछे है उसके। कुछ पल बाद बस वहाँ से निकल चूका था। लेकिन किसीका नज़र जो कब से उसी बस स्टैंड पर रुक चूका था वो अब जाती बस को निहार रहा था।लेकिन इस बार उदासी से नहीं चहरे पर मुश्कान खिली हुई थीं। अन्यास ही मोहन की नज़र मिरर से मुश्कुराते हुए सुमित पर गयीं। तो जल्दी से पीछे मूड कर
मोहन -क्या बात है भाई..?हर कोई ट्रैफिक जाम से परेशान होते है। और आज आपकी मुश्कान कम नहीं होरहे है। आखिर बात क्या है..? कुछ सोचते हुए… कहीं… जो मैं सोच रहा हूँ वो सच तो नहीं..?
सुमित मुस्कुराते हुए -आजका हमारा लेट होना घाटा नहीं गया भाई।
राज -मतलब..?तेरे मंज़िल….
सुमित -हाँ मेरे भाई आज हमें उनका दोबारा से दीदार होगया। इसका मतलब मेरा प्यार, मेरा अहसास झूठा या कोई वहम नहीं है। 💕😊
राज -congratulations दोस्त, मोहन सिटी बजाते हुए
मोहन -आज सेलिब्रेशन होगा भाई 🎊🎉बोलकर खिलकर हँस पढ़े। तब तक ग्रीन सिग्नल होगया था राज वहाँ से कार अपने ऑफिस के तरफ भगा दिया..। (सुमित एक सुकून दिल मे महसूस करते हुए एक याद मे खोगया ज़ब वो अपनी देवी को पहली बार ऐसे ही एक बस स्टैंड पर देखा था। लेकिन उसे इतना भी होश नहीं था की वो किस बस पर चढ़ रही या वहाँ क्या कर रही है नोट नहीं कर पाया। क्योकि वो मुश्कान को देखते ही अपना पूरा दुनिया भुला चूका था। वो मुश्कान की झील सी आँखो मे खुद को डुबो देना चाहता था उसी पल। उसकी चहरे की खूबसूरती व उसकी सुंदरता मे झलकती सादगी के आगे खुद को जैसे एक भक्त की तरह अपने देवी के आगे खुद को समर्पण कर दिया।और ज़ब देखते ही मतलब पहली नज़र मे ही जिसका दिल धड़क उठे उसे पहली नज़र का प्यार की नाम न हो तो क्या हो…। सुमित उसी पल अपने धड़कते दिल पर हाथ रख कहाँ था… (ज़ब तुम न मिली इस सुमित की ज़िन्दगी बनके तो, कसम है ज़िन्दगी कभी तुम्हारे सिवा कोई नहीं आएगा हमारी देवी ।)सोच कर सुमित के पलकें नम होगयी की जाने कितने महीनों बाद आज ज़िन्दगी ने मुझे खुद से मिलाया। तभी उनकी कार अचानक से रुक गयीं। तो सुमित बाहर के तरफ देखा तो वो लोग ऑफिस पहुंच चुके थे। वो आसानी से अपने पलकों के किनारे साफ करते हुए एक हाथ से बैग लिया और तेजी से तीनो ऑफिस के अंदर चले गए।
  यहाँ मुश्कान भी एंजियो पहुंच चुकी थीं but लेट भी… इसलिए वो सहमी हुई सी केवीन की ओर जारही थीं तभी पीछे से उसकी हाथ खींचते हुए किसी ने अपनी ओर किया, जिससे डर कर मुश्कान पीछे मूड कर देखी। फिर चिढ़ते हुए
मुश्कान -क्या यार आरती जान लेगी क्या मेरी..?
आरती -नहीं जी हम आपकी जान बचाने के लिए आए है यहाँ।मुश्कान अपनी भौए चढ़ाते हुए
मुश्कान -क्या मतलब..?उसकी पीछे फिर एक मिठी आवाज़ उसकी कान मे आई की (मतलब ये की…)मुश्कान मूड कर देखा तो राधिका एक फ़ाइल हाथ मे लिए उसके पास आरही थीं।तो आगे बोलो न दोनों क्यूँ पहेलियाँ बुझा रही हो। 🤦‍♀️
राधिका -यही की तू एकेली नहीं जाएगी मैम से मिलने, हम, हम दोनों साथ मे चलेंगे।
मुश्कान -क्यूँ…? तुम दोनों तो टाइम से आगयी हो न। फिर मेरे साथ क्यूँ..?
आरती -इसीलिए dear क्योकि हम अभी मैम से नहीं मिलने गयीं ज़ब तेरे आने मे देर होगयी। 😊
राधिका -हाँ उसी तरह जैसे तू कभी हमारे लेट होने पर करती हो। 🤷‍♀️मुश्कान दोनों को हग करते हुए
मुश्कान -पागल कहिकी.। सही कहता है भईया की जो मेरे साथ रहेगा वो भी मेरे तरह पागल होजायेगा। बोलकर मुश्कान हँस दी। तो उसके साथ आरती और राधिका भी जोड़ से हँसने लगी। तभी पीछे एक गंभीर आवाज़ ऊन तीनो को सुनाई दी। जिससे वो चुप होगयी और नार्मल होकर उस तरफ मूड गयीं जहाँ से आवाज़ आई थीं।तो सामने एक औरत खड़ी थीं एक हाथ मे कुछ फाइल्स और एक हाथ मे पेन लिए उनके पास आकर खड़ी हुई और तीनो को ध्यान से देखते हुए
  आप तीनो अभी इसीवक्त ऑफिस मे मिलिए। जरुरी बात करनी है आज आप लोगो से। इतना सून कर तीनो ने हाँ मे सर हिला दिया। और बिना कुछ कहें उस महिला के पीछे चल दी। कुछ ही पल के बाद तीनो एक रूम मे खड़ी थीं और उनकी नज़र कभी फ्लोर पर तो कभी सामने चेयर पर बैठी मैम को। जो भूरे रंग की साधारण सी साड़ी पहनी हुई थीं और श्रृंगार मे भी सिर्फ बालो की एक जुड़ा बनायीं हुई थीं और माथे पर एक छोटी सी कुमकुम की बिन्दी लगायी हुई थीं। उनके साड़ी मे लगा बैज पर (पूजा शर्मा )लिखा हुआ था। और वो एक ध्यान से मुश्कान, आरती और राधिका को देखी जारही थीं।उनका ऐसे देखना इन तीनो को गिल्ट महसूस करा रहा था जैसे की बहुत बड़ी गलती कर दिया है इन्होने। पूजा मैम अपनी चेयर से उठते हुए
पूजा मैम -मुश्कान, आरती और राधिका (तीनो सर झुकाये ही एक साथ “जी मैम ”बोली )तो वो इनके सामने खडे होते हुए… आप तीनो के ऊपर कोई प्रेशर है..? या कोई मज़बूरी यहाँ आने की..? इन सवालों मे उनकी नाराज़गी साफ साफ झलक रही थीं।जिसे महसूस करते हुए फिर तीनो ने एक साथ जवाब दिया “नहीं मैम” फिर क्यूँ..?
मुश्कान -माफ़ी चाहते है मैम 🙏, आगे से हम अपनी ज़िम्मेदारी कभी नहीं भूलेगे।
पूजा मैम -ज़िम्मेदारी…? ये सिर्फ एक शब्द नहीं है जानती हो न आप लोग..?
आरती -यस मैम
पूजा मैम -good, ऊन तिने के सामने एक फ़ाइल करते हुए,,,,,,, पढ़िए इस फ़ाइल को। तीनो पहले एक दूसरे को देखा और फिर मैम को देखते हुए आरती उनकी हाथ से फ़ाइल लेकर पढ़ने लगी। लेकिन उसके चहरे पर कोई भाव नहीं था वो पढ़के राधिका के तरफ किया,, वो भी पढ कर कुछ खास नहीं बदला उसका तो मुश्कान को फ़ाइल देदी। जिसे पढ़कर मुश्कान के चहरे पर खुशी सी खिल गयीं। जिससे वो प्यार से पूजा मैम को देखने लगी….।।
क्रमशः :तो जानते है की उस फ़ाइल मे क्या था जिससे मुश्कान की चहरे पर मुश्कान खिल गयीं. और सुमित मुश्कान तक कैसे पहुँचता है अगले part मे पढ़ते है।।
    बहुत  बहुत धन्यवाद 🙏🙏🙏🙏🙏
नैना…. ✍️✍️✍️✍️
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