साल के एक दिन में बाकी दिन क्यों नही महिला के,
कभी दहेज के लिए, कभी इज्जत के लिए,
कभी हक के लिए, कभी अपने परिवार के लिए,
रोज प्रताड़ित हो रही है महिला,
शुभकामनाएं मिल रही है महिला दिवस की,
नारी ही अंम्बर का चादं है, पर खुद के पास अम्बर नहीं,
जन्नत का नाजारा है, पर जिंदगी नरक से कम नहीं,
महकता आंचल है पर प्यार का सहारा नहीं,
सिर्फ एक दिन का नारा है कि दिन ये तुम्हारा है,
शुभकामनाएं मिल रही है महिला दिवस की,
समय आ गया उठना है अब और नहीं सहना है,
युग निर्माण करना है , एक इतिहास रचना है,
कमजोर नहीं समझना है जगत जननी हम है,
महिला को शक्ति बनना है ,
ताकि हर दिन हमारा हो ।
शुभकामनाएं मिल रही है महिला दिवस की।।
