मुश्कान को ख़ुश होते देख पूजा मैम अपनी चेयर से उठ कर उसके पास आई और उसके सर पे हाथ रखते हुए
पूजा मैम -जितना खुशी अपनी चहरे पर है इससे कयी ज्यादा विश्वास के साथ आप तीनो को इन ज़िम्मेदारीयों को सौंफा जारहा है।उम्मीद करते है आप लोग निराश नहीं करोगे हमें या किसी को भी।
मुश्कान -जी मैम,,,,, हम पूरी तरह इस ज़िम्मेदारी को निभायेंगे। इसके लिए ही हमें बेहद खुशी व खुसनसीबी है की हमें इस काबिल आपने समझा उसके लिए हम हमेशा आपकी आभारी रहेंगे।
पूजा मैम -हम्म…। हम करते भी क्या मुश्कान जिस तरह आप तीनो ने मिलकर यहाँ के बच्चो को संभाला है और जिस तरह इस एंजिओ के लिये आपके दिल मे प्यार और योगदान है उसके बाद तो ये होना ही था।
वैसे बहुत बहुत बहुत बधाई आप तीनो सहेलियों को इन ज़िम्मेदारीयों के लिए जिनका आप सबको कबसे चाह थीं। आज से और अभी से आप तीनो यहाँ की सिर्फ टीचर नहीं बल्कि इस एंजिओ की खास सदस्य हो, जितना हमें हक़ है कोई फैसला लेने या एंजिओ के लिए कुछ करने का उतना ही आप तीनो का भी। इसीलिए अब हम भी कुछ बेफिक्र होने लगे है बच्चो को लेकर क्योकि वो आपके साथ बहुत ख़ुश है। इसके लिये भी बेहद खुशी है हमें। आरती, राधिका और मुश्कान पूजा की गले मिलते हुए एक साथ… (Thank you soo much मैम)पूजा भी उन्हें सीने से लगा लिया।थोड़ी देर बाद चारो अलग हुई तो मुश्कान अपनी सहेलियों से
मुश्कान -तो गाइस अब हमारा लश्य और भी पक्का और खास होगया है। इसीलिए आज से कोई लेट नहीं आएगा और नाही कोई लापरवाही…
आरती और राधिका -हाँ बिलकुल 😊
पूजा -बहुत अच्छा 😊। अब जाकर बच्चो से मिल लीजिए वो भी इंतजार मे होंगे सब। इसीलिए खुद के साथ उनका भी पूरा ख्याल रखियेगा।तीनो मुश्कुराते हुए हाँ बोलकर ऑफिस रूम से बाहर आगयी और एंजिओ के गार्डन की तरफ चल दी जहाँ कुछ बच्चे खेल रहे थे तो कुछ किताबों मे ध्यान लगाए बैठे थे।जिन्हे देख ये तीनो की चहरे पर बेहद सुकून झलक रहा था। तभी एक बच्चे ने उन्हें देख लिया और खुशी से चीख पढ़ा की (दीदी आगयी, दीदी आगयी….)उसकी आवाज़ सुनकर सारे बच्चे उन्हें घेर कर खड़े होगए और उन्ही मे से एक छोटी सी बच्ची कुछ चार पांच साल की होंगी जिसका नाम पीहू थीं। पीहू बड़े ही मासूमियत से उनसे बोली
पीहू -दीदी..हहह.. हमाला..चॉकलेत…। उसकी इस मासूमियत तीनो की चेहरा और खिल गयीं। और तीनो की अपने पर्स से कुछ चॉक्लेट्स निकाली और सबको देदिया जानबूझ कर पीहू को छोड़ कर। जिससे वो अब कभी भी रोना शुरू कर सकती थीं तभी मुश्कान उसे गोद मे उठाते हुए
मुश्कान -पीहू…. मेरी प्यारी परी क्यूँ उदास है। किसीने हमाली पीहू को माला क्या…? या किसी ने डाटा जल्दी बताओ..। पीहू उसी मासूमियत से
पीहू -दीदी ने पीहू को चॉकलेत नहीं दिया… ☹️
मुश्कान -अच्छा.. अच्छा… पीहू क्या आपने अपनी दिदु को अब तक किस्सी दिया…? इतना सुनना ही था की पीहू मुश्कान की गाल पर प्यार से kiss कर दी। जिसे देख राधिका और आरती भी हँस दी। फिर तीनो ने उसकी माथे को प्यार से चूमते हुए एक एक चॉक्लेट उसे देदी। जिससे वो खुशी से झूमते हुए बाकी बच्चो के साथ खेलने लगी।उसे प्यार से निहारते हुए
राधिका -कितनी प्यारी है न यार ये…?
मुश्कान -हाँ यार बहुत प्यारी है। और पता नहीं क्यूँ पीहू हमें सबसे खास लगती है जैसे की कोई अपनी हो। आरती उसके कंधे पर हाथ रखते हुए
आरती -होता है यार ऐसा। कितना अजीब है न हमें ये मासूम ज़िन्दगी इतना अपना और खास लग रहे है। लेकिन जिन्हे लगना चाहिए, जिनके प्यार और अपनेपन की ये हक़दार है वो कैसे…. कहते कहते रुक गयीं
मुश्कान -पता नहीं आरती कैसे चैन से जीते होंगे वो लोग। खैर जो भी हो हम तो है न इनके लिए।कोई कमी नहीं होने देंगे इनकी खुशियों मे 😊😊❣️
राधिका -हाँ सही कहाँ मुश्कान हम इन्हे दिखाए गे दुनिया और इनकी ज़िन्दगी के मंज़िल की पहचान करायेगे।
आरती -हाँ बिलकुल 😊
मुश्कान -तो चलो आज एक प्रॉमिस करते है की भले हम अपनी ज़िन्दगी के खुशियों मे कम कर दें लेकिन इन मासूमों के ज़िन्दगी मे पूरी खुशियाँ भरेंगे। इन्हे ज्यादा से ज्यादा अपना वक़्त देंगे।
राधिका और आरती -प्रॉमिस…🤝
मुश्कान -तो चले अब…?क्लास का टाइम होने को है। दोनों ने हाँ मे सर हिलाया और तीनो एक एक तरफ चल दी..।
सुमित की ऑफिस…
सुमित अपने केबीन मे बैठे किसी ख्यालो मे खोये हुए मुश्कुरा रहा था। तभी राज और मोहन उसके पास आए एक एक चेयर पर बैठते हुए मोहन बोला
मोहन -यार पता नहीं इस बार कौन कौन साइड पर जाने वाले है।
राज -हम्म लंच के बाद मीटिंग है इसी बारे मे। पता चल ही जायेगा। वैसे सुमित… बोलते बोलते रुक ज़ब सुमित को दोनों ने अभी तक कहीं खोये हुए पाया तो। मोहन उसके आगे हाथ हिलाते हुए
मोहन -hello भाई…। तू ठीक है..?फिर भी कोई रिस्पांस न पाकर राज उसे कंधे से पकड़ कर झोरते हुए
राज -oyye मेरे देवदास होश मे आजा। किस दुनिया मे हो भाई..?
सुमित -तुम दोनों कब आए…? इतना सून कर दोनों ने अपना सर 🙆♂️🙆♂️पकड़ लिया।
राज -कब से हम दोनों दिवार से बात कर रहे थे क्या..?
मोहन -100%राज…। हम दिवार से बात कर रहे थे।
सुमित -बात क्या है..? बेफिक्र सा होकर पूछा तो मोहन चिढ़ते हुए
मोहन -अब तक तो हम दोनों पागल ही हुए है। लेकिन कुछ देर बाद हम तीनो मीटिंग रूम मे नहीं पहुचे तो बॉस बात सुनने पड़ेगे।
सुमित -मीटिंग..? कोई खास बात है क्या..।
राज -हाँ शायद दो तीन टॉवर की कॉन्ट्रैक्ट मिला है।किस साइड कौन कौन जायेगा इसी सिलसिले मे..।वैसे ये बता तू किस दुनिया मे था कब से..?सुमित मुस्कुराते हुए
सुमित -एक साल,3 महीने,6दिन,4घंटे,36मिनट और 12सेकंड बाद मेरी देवी दूसरी बार आज देख पाया इन आँखों ने, होठों ने मुस्कुराया, और इन धड़कन ने कुछ गुनगुनाया… मोहन उसे टोकते हुए
मोहन -वाह भाई वाह, ज़रा हमें भी तो सुनाओ यार। क्यूँ राज क्या कहते हो..?
राज -हाँ आज हम भी सुनना चाहेंगे। ज़ब दिन, डेट, टाइम की सेकंड तक याद है तो कोई तो खास बात है। लेकिन हम तुमसे निराश है भाई
सुमित -क्यूँ क्या हुआ।
राज -क्या हुआ…?10 मिनट तक कार रुकी था। एक बार भी नहीं कह सकता था की हमारी भाभी मिल गयीं। यार हम पता तो करते न कौन है, क्या करती है, कहाँ रहती है और रियल नाम क्या है उनकी…।
मोहन -और नहीं तो क्या 😏
सुमित -तुम दोनों न सच मे पागल हो।
मोहन -अब क्या कर दिए हम दो पागलो ने..?
सुमित -किया नहीं पर समझते भी नहीं हो। यार.. मैं क्या करू ज़ब उनके आगे सब भूल जाता हूँ तो..। और रही बात उनकी पहचान और पता की तो..
राज -तो…?
सुमित -मुझे पता है। मोहन और राज चौक कर एक साथ (क्या 😳 )हाँ…।
राज -तो अब तक छुपा कर क्यूँ फिर रहे हो यार। जल्दी बता हम अपने यार के लिए खुद बात करने जायेगे उनके घर।
सुमित -अच्छा। लेकिन तुम्हे तो सब पता है।
राज -कब बताया तुमने हमे…?
मोहन -हाँ मुझे भी याद नहीं कब बताया…।
सुमित -तो ठीक है फिर से बता देता हूँ। कभी भूलना मत ok..?तो दोनों ने हाँ मे सर हिला दिया और मोहन उसके बिलकुल पास आते हुए
मोहन -बोल भाई जल्दी ही।
राज -हाँ जल्दी बता….।।
क्रमशः :जानते है अगले part मे की सुमित की देवी के पता….।।
नैना… ✍️✍️
