उम्मीद शब्द जीवन में बहुत शक्तिशाली है यदि वह स्वयं से की जाए लेकिन यही उम्मीद जब दूसरे से की जाती है चाहे वह किसी भी निकटस्थ या दूरस्थ सम्बन्ध से की जाती है तो कष्टदायक हो जाती है।
कभी आजमाइश करके देखिए कि उम्मीद करके अप्राप्य होने पर जो कष्ट होता है उससे लाखों गुना सुखदायक नाउम्मीदी के प्राप्य में होता है।
सोचिए आप सरप्राइज से क्यों खिल उठते हैं? यही तो कारण है। गाँठ बाँध लीजिए कभी किसी उम्मीद न कीजिए सदैव प्रसन्नचित्त रहेंगे। सिर्फ और सिर्फ अपने से उम्मीद करें और अपने पर भरोसा रखें। कभी दुःख फटक भी नहीं सकता। वो ऊपरवाला है न सबकुछ देखने निपटाने के लिए, हमें तो बस अपना कर्म देखना है,तो फिर फिक्र किस बात की!
धन्यवाद!
राम राम जय श्रीराम!
लेखिका- सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक विचार, 
सुषमा श्रीवास्तव
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