हरपल करती है बेचैन, जिसकी कोई तस्वीर नहीं है।
सिर्फ एक ख्वाब है वो, जो मुझको नसीब नहीं है।।
हरपल करती है————————–।।
उससे करूँ मैं सवाल, कहो तेरा नाम क्या है।
अदा से मुस्कराती है वो, मगर मेरे करीब नहीं है।।
हरपल करती है————————-।।
शरारत करती है ऐसी, पर्दे में वह खुद को छुपाकर।
पढ़ती है मेरे लिखे खत, मगर बातों में कशिश नहीं है।।
हरपल करती है————————।।
समझाये कौन दिल को, करता है प्यार उससे बहुत।
मानता है उसको हमदर्द, मगर मेरी तकदीर नहीं है।।
हरपल करती है———————–।।
देती है दस्तक हरपल, दिल के दरवाजे पर आकर।
मगर नहीं करती है दोस्ती,मेरे वो नजदीक नहीं है।।
हरपल करती है————————।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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