ओ री गौरेया! मेरी प्यारी गौरैया!
तू तो भोर की सुचना देती है रोज,
मन प्रफुल्लित तन ऊर्जस्वित कर,
अपनी चहचहाहट का मधुर स्वर, कानों में देती है संगीत ऐसा घोल,
लगता है मधुपर्क का किया पान,
संसार में तुझे घटता देख हुई
चिंता, संकल्प लिए गए तुझे बचाने को, बस बन गया एक “विश्व गौरेया दिवस”मनाने को
पर मेरे द्वारे, बाग- बगीचे और छत का आँगन तो तेरे मधुर संगीत का चिरपरिचित साथी है,
यह मेरा सौभाग्य है या है तेरा प्यार! घर- आँगन, छत का कोना कोना कूजित होता मधुर विहग वृंद के कलरव से और दे जाता अनुपम नूतन दिवस फिर जीने को।
साथियों!विश्व गौरैया दिवस को गौरैया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसके अलावा ये शहरी वातावरण में रहने वाले आम पक्षियों के प्रति जागरूकता लाने हेतु भी मनाया जाता है। इसे हर साल 20 मार्च के दिन मनाया जाता है। ये नेचर फॉरेवर सोसाइटी और इको-सिस एक्शन फ़ाउंडेशन के मिले जुले प्रयास के कारण मनाया जाता है।
उस गहरे नीले अंधेरे से
आलोक-स्फुरित होकर आने से पहले,आती है एक दस्तक सुखद द्वार पर,
एक और थपथपाहट आलस्य-भरी
तृप्ति के उदगम पर
गौरैया फुदकती है
दो-तीन बार
अंधेरे पुष्प के उजले प्रस्फुटन के
बाद।
मानो कहती हो जैसे उठो संचरित हुआ एक नवल नूतन दिन।
लेकर अपना दाना-पानी चहक-चहक कर खुशी जताती,
उन्मीलित पलकों से भी आभार जताती, कल फिर आऊंगी ऐसा संदेशा दे जाती,नील गगन में फुर्र हो जाती,सच जीने की राह दिखा जाती,
नन्हीं नन्हीं फुदक फुदक कर चिड़िया रानी।।
लेखिका – सुषमा श्रीवास्तव
मौलिक रचना,सर्वाधिकार सुरक्षित,
