अंगना है हमारे ,गौरैया का बसेरा
चीं -चीं की सुर से ,होता है सबेरा ।।
आम के वृक्ष को, अपना नीड़ बनाया
गौरैया के झुंड ने ,अपना कुटुंब बसाया ।।
गोरैया चिड़ियों का ,चीं-चीं सुर से चहकना
डाल से डाल, यू मस्त होकर फुदकना ।।
अंगना में फुदकर आए ,चुगने जो दाना
देखकर नन्ही चिड़िया, मिले खुशी का खजाना।।
गौरैया के मधुर स्वर से ,दिल खुश हो जाता
सुरमयी संगीत से ,आंगन मेरा खिलखिलाता ।।
“गौरैया ओ गौरैया” ऐसे ही चहचहाना
मेरे अंगना को छोड़ ,तू दूर हमसे ना जाना ।।
गौरैया ही हमारी प्रकृति, सुंदर नन्ही चिड़िया
मधुर स्वर से चहकती, फुदके बगिया- बगिया ।।
“गौरैया ओ गौरैया” सदा ऐसे ही चहचहाना
संरक्षण तुम्हारी करके “प्रकृति” को है बचाना ।।
( २० मार्च विश्व गौरैया दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं)
मनीषा भुआर्य ठाकुर✍️( कर्नाटक)
