ओ मेरे मालिक , आया हूँ तेरे द्वार।
लेकर फरियाद, मैं पहली बार।।
मुझ पर भी कर, कुछ रहम तू।
ताकि मैं पाऊं, सबका प्यार।।
ओ मेरे मालिक——————-।।
वो मेरा ख्वाब, मेरी जिंदगी है।
इसीलिए तुमसे, यह बंदगी है।।
मिटा दे नफरत, उसके दिल से।
नहीं हो हमारी, कभी तकरार।।
ओ मेरे मालिक—————-।।
छुपा नहीं रहा हूँ, कुछ भी तुमसे।
गुनाह बस यही हुआ है, मुझसे।।
सच्ची मोहब्बत की है, उससे।
मिला दे मुझको, मेरा वह यार।।
ओ मेरे मालिक——————-।।
आबाद रखना, उसको सदा तू।
मेरी उस दिलरुबा को, सदा तू।।
लुटे नहीं कोई , उसकी खुशियों को।
बसाना तू उसका, सुखी संसार।।
ओ मेरे मालिक——————-।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आजाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
