आज की महफ़िल में, आज इस रुखसत पर।
आपको देने विदाई, हम नहीं आये।।
हम यहीं कर रहे हैं, आपके लिए दुहायें।
बीते पल याद आने पर, ऑंसू हम रोक नहीं पाये।।
आज की महफ़िल में——————।।
वह तालीम आपकी, नजीर अपने चमन की।
नजाकत देख हमारी, दी खुशी जो मन की।।
तस्वीर वह देख रहे हैं, नसीब अपना समझकर।
वक़्ते-रुखसार पर हम, दर्द यह सह नहीं पाये।।
आज की महफ़िल में——————।।
वहम के छाए कोहरे में, हो गए गुमनाम हम।
अहम करके दौलत का, हो गए बदनाम हम।।
हो गए आजिज अब, अपनी इस आदत से।
पनाह वह आपके दिल की, भूल हम नहीं पाये।।
आज की महफ़िल में—————–।।
मुकम्मल कब हुआ है ख्वाब ,रुसवाई में दिल का।
चिराग कब जला है, तूफानों में मंजिल का।।
मगर मिलता है शुकून हमको, आपका साथ पाकर।
कर्ज वह आपका हम पर, चुका अब तक नहीं पाये।।
आज की महफ़िल में—————–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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