अब वह खिलखिलाती नहीं है,
बस एक तिरछी सी मुस्कान है,
अब वह शिकायतें नहीं करती,
बिना सिर पैर की,बेमतलब की
तुमसे बातें दो चार नहीं करती,
जरा सी बात पर वह तुमसे कोई
फ़िर झगड़ा बार बार नहीं करती,
तुम्हारे किसी ताने पर वह तुमसे
भूलकर भी, तकरार नहीं करती,
तुम्हारे दिल दुखाने पर भी,उसकी
आँखो से कोई बरसात नहीं होती,
उसकी हर छुअन में, एहसास में,
तुम्हें,फ़िर कोई गर्माहट नहीं होती,
तुम्हारे हर सवाल पर जब, उसके
जवाब में सिर्फ़ मौन पसरा मिले तो,
समझलो कि, उसकी तुम्हारे पास
लौटने की भी, गुंजाइश नहीं होती,
तुम सोचते रहते हो कि, तुमने उसे
जीत लिया है,पर ऐसा होता नहीं है,
समझलो कि,फ़िर तुम्हारी होकर भी
उसको पाने की कोई आस नहीं होती,
✍️शालिनी गुप्ता प्रेमकमल🌸
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)
