“गौरी के भागीन” ( भांजे )

“ननद की विदाई के बाद गौरी कुछ दिनों तक तो आराम से रहीं। परन्तु महादेव तो सुबह घर से निकल जाते और दोपहर बाद घर आते। गौरी पूरे दिन घर में अकेली बैठी रहतीं। कोई नहीं था, जिससे  बात कर  सकती। उनका  मन उकताने लगा।फिर  एक  दिन  महादेव  से  कहती  हैं।देखती  हूं  सबके  भागिन  आते  हैं और  मामी  से मजाक  करते हैं  हंसी ठठ्ठा  करते  हैं।हमारा भी बहुत मन है। हमारे भी भागिन आते हम भी उनके साथ हंसी मजाक करते तो, समय आसानी से गुजर जाता।महादेव कहते हैं। सबके भागिन और हमारे भागिन में बहुत फर्क है। आप ननद का भार तो उठा नहीं पायी और अभी भागिन को बुलाने की बात करती हैं।अच्छा तो अब हमारी समझ में आ रहा है हमने आपकी मां को बुलाकर छोटा सा मजाक किया था।आप हमारे परिवार वालों से बदला ले रही हैं।गौरी ने कहा, नहीं आपका परिवार हमारा भी परिवार है। मैं दिन भर घर में अकेली रहती हूं। इसलिए मन होता है,‌ कोई अपना हो। जिसके साथ हंसी मजाक कर समय गुजार सकूं। महादेव ने कहा। आप सोच लो ननद से तो आप एक दिन में ही परेशान हो गयी थी। भागिन  से  पता  नहीं  एक  घड़ी भी  निभा पाओगी या नहीं।गौरी ने कहा क्यों? आपको हम पर जरा भी विश्वास नहीं है?महादेव ने कहा,  हमने  तो  सचेत  किया है, बाकी आप  देख  लो। आपको  क्या  करना  है। कल आपके  भागीन  आ  जाएंगे।भागिन के आने की खुशी में गौरी सुबह से उठकर उनके लिए तरह-तरह  के व्यंजन  बनातीं  हैं। पकवान बनाकर बगीचे से बहुत सारे फूल लाकर पूरे घर आंगन को अच्छे से सजाती है। पूरे उत्साह और व्यग्रता से गौरी अपने भागिन की प्रतीक्षा करने लगती हैं। जल लेने गौरी सरोवर जाती हैं कि रास्ते में हीतभी जोरों की आंधी तूफान आता है। गौरी के आंगन के सारे फूल आंधी तूफान में उड़ जाते हैैं। गौरी जो साड़ी पहने रहती है वह साड़ी उड़ने लगती है। वह लज्जा वश वहां से आंगन की तरफ भागती हैं। भाग कर अपने घर में छुप जाती हैं। क्योंकि वह जितना भी अपनी साड़ी संभालने की कोशिश करती है उतना ही उनकी साड़ी उनके शरीर को छोड़कर उड़ने लगती है। वह  शर्मसार  हो जाती  है।  तभी  महादेव आते  हैं,और गौरी से पूछते हैं । कहां हैं भागिन? कैसा लगा आपको उनसे मिलकर ?आप घर में छुप कर क्यों बैठी हो? बाहर आओ।गौरी कहती हैं। बाहर बहुत जोरों की आंधी तूफान आने के कारण मैं घर के अंदर बैठी थी। आपके भागिन तो अभी तक आए ही नहीं।महादेव कहते हैं। वो आए भी और चले भी गए। आप घर में छुप कर बैठी रही। आप से पहले ही कहा था। आपसे हमारे भागिन का सत्कार और सम्मान नहीं होगा। गौरी कहती हैं। परन्तु आपके भागिन आए ही कहां?महादेव कहते हैं। आपके बनाए हुए पकवान, सब भोजन, उनके स्वागत में बिछाए हुए फूल सब यह बता रहे हैं कि वह आए  और चले भी गए। हमारे भागिन पुरवा, पछुवा, वह आंधी तूफान ही तो हैं। वही हमारे भागिन हैं। आंधी तूफान के आते ही आप तो घर में छुप गयी। आप हमारी भागिन का स्वागत कैसे करती? आप के बनाए हुए भोजन और स्वागत में बिछाए हुए पुष्प सब का आनंद ले कर वह चले गए। आप मिल भी नहीं सकी। डरकर घर में छुप कर बैठ गयी।गौरी ने देखा जितने भी भोजन उसने बनाए थे सब बर्तन यहां वहां लुढके पड़े थे ।सारे ही भोजन पर जंगल झाड़ धूल  पड़े हुए थे। सारे ही भोजन बेकार हो चुके थे। गौरी कहती हैं जैसे आप वैसे ही आपके परिजन।क्या आप के परिवार में कोई स्वाभाविक व्यक्ति नहीं हैं?महादेव ठठा  कर हंस पड़ते हैं और कहते हैं ।आपको ही तो हंसी मजाक करने वाले भागिन चाहिए थे ।और जब हंसी मजाक किया तो आप तो बुरा मान गयी।😄😄क्रमशः

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