सभा में तेरा मिलना ,
बड़ी ही भूल हो गई ।
गम सारे छिपाते निकले ,
लबों की हंसी गुल हो गई ।
मिली दोस्ती की सजा ,
जिंदगी मेरी गुम हो गई ।
गम भुलाने हम चले ,
फिर सभा मशहूर हो गई
समझौता गमों से कर लो ,
सारी दुनिया गोल हो गई ।
चाहा जज्बातों को छुपाना ,
स्वप्नो की कली फुल हो गई।
कोई गीत ले गुनगुना ,
यही रश्मि की भूल हो गई।
समझौता गमों से कर लो ,
सारी दुनिया गोल हो गई ।
अपनी रश्मि……
स्वरचित मौलिक १४ जी
रश्मि गुप्ता रिंकी
खरगोन ,मध्य प्रदेश
