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आज फिर ये दिल धड़क उठा है बेवजह हमारी
लगता है आज उन्हें भी हमारी याद आयी होंगी
यूही तो नहीं भर आयी है आंखें हमारी भीड़ मे भी
जरूर हमारे सनम की पलकें तन्हाई मे रोयी होंगी
हर रोज़ से ज्यादा ये बेचैनी क्यूँ घेरा है इस कदर हमें
क्या उन्हें भी ये बेक़रारी कभी सताई होंगी
दिल कहता है कभी तो लौटेंगे वो हमारे शहर मे
ये इंतजार की घड़ी प्यार मे हमारी कभी तो पूरी होंगी
क्या पता क्या क्या बिता होगा उस हमदम के दिल पर भी
जो मजबूर होगए लौट कर फिर ना आने की
समझ सकते है जुदाई उनका भी नींद उड़ा लिया होगा
देर रात तक आँसूओ ने उनका साथ भी निभायी होंगी
जाने क्यूँ इतना तड़प क्यूँ होरहा है उनके दीदार की हमें
शायद उनके धड़कन ने भी हमारी नाम से धड़की होंगी
आज कुछ बात तो इन फिज़ाओ मे भी ख़ास दिखा है हमें
लगता है ये मौसम की इस अंदाज़ से ही, उनके शहर मे भी बरसात हुई होंगी
अभी अभी तो खामोश थीं हर अल्फाज़ हमारे दिल के
यूही अचानक से क्यूँ नैना अपनी हाथो कलम उठा ली
हम भूले नहीं है अब तक की उन्हें भी शायरी लिखने का शौक था
शायद आज फिर से उनके साँसे हमारे लिए कोई ग़ज़ल गुनगुनाई होंगी….!!
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नैना…. ✍️✍️
