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ये ज़िन्दगी भी क्या पहेली है समझ नहीं आती
तड़पता है साँसे सीने मे पर जाने क्यों जान नहीं जाती
बहुत मुश्किल से गुज़रता है अब पल पल ज़िन्दगी हमारे
कितना भी कोशिश करें ये गम हमसे दूर नहीं जाती
सुना था हमने पहले अब खुद भी महसूस कर लिया
ये खुशियाँ कभी किसी को हमेशा रास नहीं आती
कभी दिखाती है सपने आँखों को आसमानो के दुनिया की
हकीकत मे हमारी मौजूदगी भी किसीको रास नहीं आती
कितना ज़ालिम होते है ये पल हमारे ज़िन्दगी का भी
कर देता है इतना मजबूर की इसे ज़रा भी रहम नहीं आती
कभी हँसाता है इतना की तन्हाई का कोई आलम नहीं होता
कभी रुलाते हुए कर देता है तन्हा की कोई कारवा नज़र तक नहीं आती
कहते है वक़्त सब खेल खेलता है हमारे ज़िन्दगी मे
पर इतना भेदभाव क्यों करना,की ज़िन्दगी ही सज़ा बन जाती
किसी को मिल जाता है अपनों की महफिल बिन मांगे ही
किसी के दिल को चंद लम्हो का सुकून भी नसीब नहीं होती
सही क्या गलत क्या ये दिल सब समझता है ज़िन्दगी मे
लेकिन इसे कौन समझें जो दिल की जुबाँ नहीं होती
टूटता भी है,बिखरता भी है लेकिन इसकी आह कोई नहीं सुनता
खामोश होकर रह जाते है नैना जब इसका दर्द सही नहीं जाती…!!
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नैना…. ✍️✍️
