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वसंत पंचमी हमारे जीवन के लिए
एक बहुत ही सुखद व प्रेणा दायक उस्तव है
आज के दिन ही
भगवान विष्णु ने अपने कमंडल से
जल छिड़क कर
माँ स्वरस्वती की उत्पन्न किये थे
इसीलिए आज का दिन
माँ शारदा की जन्मदिन भी माना जाता है
आजके दिन से संसार मे
बिद्या व संगीत की देवी माँ शारदा ने
अपने कोमल वाणी व अपने कलाओ से
जगत पिता ब्रम्हा के मन मे
सर्व श्रेठ जगह बना लिया था
जिनसे वो ख़ुश होकर
स्वरस्वती व बिद्या की देवी
वीणा दायिनी के नाम से पुकारा था
उनके ही आसिम कृपा से
संसार मे अनेको कलाओ और
बिभिन्न प्रतिभाओ की शुरुआत हुई
अनेको कवियों व ग्रंथो की
संसार मे एक प्रतिमा स्थापित होपाया है
इसीलिए कहाँ जाता है की
आजके दिन से किसी भी बिद्या की
शुरुआत करना बहुत ही शुभ होता है
ज़िन्दगी मे कभी ज्ञान नष्ट नहीं होती
वर्षो पूर्व संसार की स्त्रिया
आजके दिन अपने पति को
काम देव की रूप मे पूजन करती थीं
जिनसे भगवान कृष्णा की कृपा
उनके जीवन मे सदैव बनी रहती है
वसंत ऋतू सिर्फ एक ऋतू ही नहीं
बल्कि हर प्राणी के जीवन की
एक नवनीत खुशियों की नयी शुरुआत होती है
आजके दिन से होली के संगीत
रंगों के साथ संसार मे गूंज उठता है
फसलों मे बृद्धि व बाग़ की खूबसूरती
खिल उठता है धरती का कण कण
हरिलायो से इस नव ऋतू की स्वागत मे
आम के साथ कयी फलो की पेड़ मे
नवनीत फल की सुभागमन होता है
हर तरफ खुल कर गाती है कोयल
मौसम जैसे कोई संगीत गुनगुनाता है
सच मे बहुत ही मनमोहक होती है ये
हमारे ज़िन्दगी के लिए वसंत ऋतू
भारत के हर एक क्षेत्र मे
आजके दिन माँ शारदा की पूजा होती है
घर और आँगन को
पिले रंग की फूल व रंगोलियों से सजाया जाता है
ये उस्तव सिर्फ भारत मे ही नहीं
अनेक देशो मे जहाँ भारतीय संस्कृति का
सम्मान दिल से हर हिन्दू करता है
हर जगह आज ये त्यौहार मनाये जाते है
और हो भी क्यूँ न
हमारे भारतीय संस्कृति है ही इतनी अच्छी
जो हर हिन्दू के दिल मे
माँ स्वरस्वती की आशीर्वाद के रूप मे
हमारे रग रग मे जो बसता है
आजके दिन हम भी
तनमन से माँ शारदा की नमन करते हुए
धरती की सबसे पहली ऋतू
इस पावन वसंतोत्सव को हर्षोल्लास के साथ मानते है…!!
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🙏🙏जय माँ शारदे, जय माँ स्वरस्वती 🙏🙏🙏
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बीत गए दिन पतझड़ के
झूम कर मौसम-ए-बहार आया
खिल गयीं कालीया नयी नयी
गुलशन है खुश्बूओ से महकी
गुज़र गया जैसे दिन गम के
खुशियों के नए नए ख्वाब सजाए
रंग गयीं धरती जैसे रंग वसंत रंगोली मे
वैसे ही ज़िन्दगी को हम रंगों से भरे
सजा है मन की दुनिया आज
उम्मीदो की नए नए रौशनी से
आएगी दिन इससे भी खुशनुमा
कहते है उड़ते पतंग आसमानो मे
लग रही धरा कोई दुल्हन जैसी
सरसो, गेहूं लहराए जैसे बहके चुनर सर से
लग गयीं झूले बागो मे पेड़ो पर
नाच उठी है गोरिया पहन चोला वंसती की
हर तरफ फ़िज़ा मे अब रंग ग़ुलाल उड़ेगी
झूमेगी दुनिया देर नहीं अब दिन होली की
सज गया है वो आसमान
अभी से ही देखो ऊन बादलो से
जैसे बरसेगी ग़ुलाल
खुशियों की उस फलक से
क्यूँ न गाये कोयल झूम कर बागो मे
आगये जो वंसत ऋतू
हमारे सुनी ज़िन्दगी मे खुशियाँ भरने
बहकी बहकी हवाएं जो सूर बाँध रहे है
खेतो मे लहराती फसले गीत कोई गारही है
मुस्कुरा उठा वो आसमान भी
देख खूबसूरती से सजी दुल्हन सी धरती का
जिस तरह नदियों के किनारे से लेकर
पहाड़ो की चमचमाहट..
फूलो मे बढ़ी नूर के साथ साथ
आम के पेड़ो मे लगी वसंत डालियों की सुंदरता
क्यूँ न झूमें मौसम अपने धुन मे
जो सबसे बढ़ी खुशियों का त्यौहार
वसंतोत्सव हम दिल से मनाये
माँ शारदा हम सबके जीवन मे
बिद्या की आपार प्रकाश प्रदान करे…!!
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🙏🙏🙏वसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं बहुत सारी सुभकामनाएँ 🙏🙏🙏
नैना… ✍️✍️🙏
