माँ शारदे का जन्मदिन।
प्रकृति का आनंदोत्सव।।
कण कण में उल्लास।
कला और कलाकार।।
सृजन वागीश्वरी के चरणों में।
गाते होली मनाते वाणी उत्सव।।
कलम और तूलिका हँसते उत्साह भर।
आई बसंत पंचमी धरा हरषाई।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
