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ज़िन्दगी मे कभी नहीं भूलती वो कोहरे की रात
दिल अब भी घबरा उठता है ज़ब ज़ब याद आती वो रात
हर तरफ फैला था कोहरा अपनी कहर छाये
आँखे ढूंढ रही थीं हर तरफ तुम्हे ही उस कोहरे की रात
अपनों की साथ छोड़ कर निकल आयी थी तेरे लिए
पर तुम्हे कोई फर्क न पढ़ा हो जैसे वक़्त न था मेरे लिए
फिर भी दिल मे आस था तुम आओगे थामने हाथ मेरा
आँखे ढूढ़ रही थीं हर तरफ तुम्हे ही उस कोहरे की रात
हर तरफ धुंध था फैला राहे भी सुनसान पड़ी थीं
कभी पास तो कभी दूर दूर से कोई आहट सी महसूस होरही थीं
दिल पागल घरबरा उठा था डर से उस अँधेरी सी रात मे
आँखे ढूढ़ रही थीं हर तरफ तुम्हे ही उस कोहरे की रात
बेचैन से दिल मे अजीब अजीब ख्यालो का तूफान जैसे
कभी सोची नहीं थीं तुम छोड़ दोगे हाथ मेरी कुछ ऐसे
आँखों से बहती आँसू मेरे टूटे दिल का हाल बयां करती
ढूंढ रही थीं आँखे तुम्हे ही हर तरफ उस कोहरे की रात 
आगे न कोई मंज़िल बची थीं न कोई पीछे खड़ा साथ मेरा
दिल टूट के बिखरा टुकड़ो मे कर दी बेदर्दी क्या हाल मेरा
तुम्ही तो थे एक मेरे लिए सबसे ऊपर मोहब्बत मे मेरे
यही सोच सोच बिखर रही थीं मैं उस कोहरे की रात
वो हर पल परवाह करना मेरा हर ख़ुशी का ध्यान रखना
सब एक दिखावा था हरजाई झूठा निकला प्यार तेरा
चीख चीख कर धड़कने पुकारती रही पर तुम न आए जो
आँखे ढूंढ रही थीं हर तरफ तुम्हे ही उस कोहरे की रात
जिसके चाहत मे छोड़ दी अपनों को भी वही खुदगर्ज़ निकला
महसूस कर अपनी दिल के बेबसी साँसो से दर्द की आह निकला
क्या क्या ख्वाब सजाये थे मिलकर साथ जीने मरने की
हर ख्वाब बिखरता जारहा था मेरे उस कोहरे की रात
खुद मे ही सहमी सी जो कुछ दूर यूही निकल आयी
कुछ होश न था की कहाँ से निकली थीं कहाँ पहुंच गयीं
खुद को इस तरह भूल बैठी थीं तेरे इश्क़ मे डूब कर
दर्द का भी अहसास न रही यूँ लाश बन गयीं थीं उस कोहरे की रात
बीत गए वो पल बरसों लेकिन जख्म आज भी गहरी है
जिस मोड़ पर छोड़ गए थे उसी राह पर आज भी आँखे ठहरी है
बोझ सी लगने लगी ज़िन्दगी अब पल पल चुभने लगी साँसे
आज भी बैठी है इंतजार मे नैना जिस हाल मे छोड़ गए थे उस कोहरे की रात….!!
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नैना…✍️✍️
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