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वक़्त के साथ बदलते मौसम के साथ
प्रकृति के नज़ारे भी बदलते जाते है
कभी बारिश, कभी शर्दी, कभी पतझड़ तो बहार आते है
इनके साथ साथ जंगल हो या पहाड़..
शहर हो या छोटा सा गाँव ही क्यूँ न हो
धरती के हर कोने की प्रस्तिथिया बदलती है
कोई अपने जीवन के लिए सुन्दर से सुन्दर
उपवन व पेड़ पौधो को नाश कर देते है
तो किसीके जीवन की सुकून ही इन प्रकृति से मिलता है
और इन सबसे परेह पंछीयो के बारे मे भूल जाते है
पशु पंछी भी एक जीव है जो बस हम इंसान की तरह
वो अपनी ब्यथा किसी हमसे नहीं कह सकते है
लेकिन वो अपने भाषा मे अपनी सुरीली स्वर मे
हमें अपनी हर बात बयां करती है
जिन्हे हमसब समझ नहीं पाते है कभी
बल्कि उनके मिठी मिठी आवाज़ मे खोजाते है
छोटे छोटे बच्चे हो तो कितना भी रोते हो
पंछीयो के मधुर आवाज़ सून मुस्कुरा उठते है
कोई बुजुर्ग हो तो कहते है की कोई सन्देश देरहे है
गर कोई कवि या शायर हो तो
उनके स्वर पे जाने कितने अल्फाज़ लिख देते है
लेकिन…
ये हम क्यूँ नहीं सोचते की ये पंछिया(चिड़िया)
कहाँ रहते है, कैसे रहते है..
हाँ ये पेड़ो के साखो पर अक्सर पाए जाती है
लेकिन ऊन पेड़ो पौधो को भी तो
काटने लगे है हम अपने जीवन के ख़ुशी के लिए
वो कहाँ अब रहेगी, और कहाँ जाएगी
प्रकृति की त्वतों से वो कैसे बचती होंगी
ये कोई नहीं सोच पाते..
हम बात कर रहे है गौरैया चिड़िया की..
जो ज्यादातर वसंत ऋतु और बारिश के मौसम मे
हमें दिखाई पढ़ती है
छोटी छोटी सी चिड़िया खूबसूरती के मुरत सी
संगीत के हर सुरों से घुली उनकी मिठी चहक से
पूरी फ़िज़ा मे धुन सी छेड़ देती है
जिससे लगता है मौसम कोई गीत सुना रहा हो
लेकिन पहले से अब बहुत कम दिखने लगी है
वजह है हम घर और बागो के पेड़ उजाड़ देरहे है
ज़ब उन्हें छुपने या रहने की कोई
शीतल सी छाया नहीं होगा तो वो कहाँ ठहरने वाली है
ये ऐसी ही जगह रहती है
जहाँ हरि भरी उपवन हो, फूलो की हंसी बाग़
हवाओ से बात करते पत्ते व झूलो सी झुमती साख हो
जहाँ उन्हें हर मौसम से बचने की पूरा सुभीदा हो
इसीलिए हमें चाहिए की खुद के साथ
इन पशु और चिडियो के बारे मे भी कुछ सोचा चाहिए
ज्यादा नहीं तो अपने आँगन मे
फूलो से और पेड़ पौधों से भरे एक उपवन सजाये रखे
साथ ही जो पहले से तालाब य कुवा हो
उन्हें भरने के बजाय उन्हें और ध्यान दें की
उनके जल कभी सूखे न जिनसे
इन पंछीयो की प्यास मीटती है
इन सबसे हमें कोई नुकसान नहीं होगा
बदले मे हमारे घर आँगन का फ़िज़ा खूबसूरत होजाता है
जिनसे हमें ही सुकून व सुबह शाम
टहलने से कितना भी उलझन हो ज़िन्दगी..
जितना देर ऐसे जगह रहते है उतनी देर के लिए
हम सब भूल कर सुकून के पल बिता सकते है
जो हमारे सेहद और ज़िन्दगी के लिए भी बहुत खास होता है….!!
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नैना… ✍️✍️गौरैया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं भकामनाएँ 🙏🙏
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