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गणतंत्र दिवस की त्यौहार
आज पुरे भारत देश मे मनाये जारहे है
छोटे बच्चे से लेकर बड़े बूढ़े तक की जुबाँ से 
आज जय हिन्द जय भारत गुंज रही है
हर कोई गर्व कर रहा अपने तिरंगे पर
सिर्फ इस लिए नहीं की
आज गणतंत्र दिवस है तो ही
बल्कि इसीलिए जिस तरह खुला आसमान मे
आज भारत मे हर जगह 
तिरंगा आज़ाद लहरा रहा है
उसी तरह हर भारतवासी खुलकर
आज़ाद से सुकून की सांस लेरहे है
हर चहरे पर खुशी की मुश्कान
हर दिल मे मातृभूमि के लिए बेपनाह मोहब्बत
हर धड़कन से निकल रही जो
वन्दे मातरम की शोर ज़िन्दगी को खुशनुमा कर रही है
इस खुशी को महसूस करके
जो दिल को सुकून मिल रही है
क्या हमें इसका वजह कभी पता की है…?
कभी नहीं किया होगा किसी ने
क्योकि हमें यही लगता है की
ये खुशी मातृप्रेम व देश के प्रति मोहब्बत की वजह से है
या फिर ये कह सकते है की
हमारी भारत माता सबसे पवित्र और
हर बन्धन से स्वतंत्र है
लेकिन ये संभव कैसे हुआ है
इसका सही वजह हम भूलते जारहे है
भारत माँ की वीर पुत्रो की शहीद होना
और उनके देशप्रेम के लिए जो क़ुरबानी दी है
वो सब कुछ आजकल मिटते जारहे है
हर कोई बदलते दुनिया के दौर मे
रेस लगाए हुए है सबको आगे निकलना है
आजकी इतिहास से उनका नाम तक मिटते जारहे है
अगर आजकल के बच्चो से पूछा जाए
की भारत के महान शहीदों के नाम बताओ तो
वो चेहरा देखते रह जायेगे 
जिन्होंने अपने मातृभूमि के लिए
ब्रिटिशो के खिलाफ क्रन्तिकारी बन गए
जिन्होंने देश मे सविधान की परिभाषा बनाया
अनेको भारतीय संस्कृति व
निष्पश एकता की मिशाल कायम की
अनेको शहीदों मे से एक महान राष्ट्रीय पुत्र
श्री भगत सिंह जी भी थे
जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए
कम उम्र मे ही क्रन्तिकारी बन गए
और अपनी परिवार को त्याग कर
भारत माता के रक्षा के लिए निकल पढ़े
अपने एक माँ की आँचल छोड़कर
देश की माँ को गुलामी से मुक्त कराने के लिए
समाज को जागरूत करने के लिए
इक़बाल जिंदाबाद की नारे लगाते हुए
23 साल की उम्र मे ही अपने दो साथी
श्री राजगुरु जी और श्री सुखदेव जी के साथ 
हँसते हँसते फांसी पर चढ़ गए
और आख़री सांस से निकलता आवाज़ भी
यही था की….
“माँ रंग दें बसन्ती चोला”
ये भारत माँ की वो वीर पुत्र थे
जिनके मौत से भी ब्रिटिशो के दिल मे
भयंकर खौफ भर गया था की
कहीं इनकी मौत से ये हिन्दू हमारी जान न लेले
इसी डर से ब्रिटिशो ने
निर्धारित किये फांसी की तारिक की
11 घंटे पहले ही उन्हें फांसी पर लटका दिया
यहाँ तक की उनकी शव को भी
अपनों से दूर करना चाहा
लेकिन असफल रहे
कहते है न दिल मे चाहत हो जिसके लिए
उसने कोई दूर नहीं कर सकता
मरने के बाद भी मिल ही जाते है
जैसे भगत सिंह जी को
ऊन ब्रिटिशो ने
उन्हें उनकी मातृभूमि से अलग नहीं कर पायें थे 
जो मान और सम्मान की हक़दार थे वो
वो हर सम्मान उन्हें मिला
और ज़ब तक ये संसार रहेगी
तब तक उनका नाम अमर रहेगा
और वही नहीं भारत माँ के
अनगिनत शहीद पुत्रो की बलिदान
और समर्पण की वजह से
आज हम खुले हवा मे
आज़ाद पंछी की तरह उड़ रहे है
जाने कितने रात वो सोने नहीं होंगे
भारत माता की रक्षा मे
तब आज हम चैन की नींद रातो को सोते है
भारत की इस पवित्र धरती की कोने कोने को
ब्रिटिशो की गुलामी से अदाज़ कराये
और उन्ही के बलिदान और मातृप्रेम की वजह से
आज खुले आसमान मे
हमारी भारत माँ की गौरव
और हम हिन्दुओ की शान तिरंगा स्वतंत्र लहरा रहा है 
आज तक भारत माता की आँचल पे
कोई दाग़ नाहीं लग पाया है और 
ज़ब तक इन महान शहीदों जैसे
माँ की संतान इस ज़मीं पर जन्म लेते रहेंगे 
तब तक इस पवित्र तिरंगे पर
कोई आंच तक नहीं लगा सकता है
क्योकि हम भारतीय की हर सांस पर
अपने भारत माता के नाम लिखा होता है
ज़िन्दगी के आख़री दम तक
हम हिन्दू गर्व से वन्दे मातरम बोलते है
और हर किसी के धड़कन से 
जय हिन्द जय माँ भारत निकलता है…..!!
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नैना…. ✍️✍️✍️🇮🇳🇮🇳वन्दे  मातरम…. 🇮🇳🇮🇳
🙏जय हिन्द 🇮🇳जय भारत 🙏
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