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ए दिल अब कब तक तन्हा रहेगा यूही ज़िन्दगी मे
अब तो अपनी ज़ज़्बातो को कोई नाम दें
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे हर अहसासों की
खोल दें हर राज़ देखो मोहब्बत का मौसम आया है
बहुत रह लिया खामोश अब कुछ खुलके बयां कर
जितने भी बात रुकी है लबों पे आज वो हमसे बयां कर
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे हर ख्वाहिशों की
ए दिल कर दें आज़ाद अब देखो बहारों का मौसम आया है
कब तक कश्मकश मे जीते रहे ज़िन्दगी पल पल
अब क्यूँ न कोई नाम दें दें हम इसे कुछ खास मिलकर
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे हर ख़ुशी की ज़िन्दगी मे
चल आज महसूस करते है जो कुछ पल खास मिला है
ए दिल कब तक यही जागते रहे रातो मे कहीं खोये खोये
क्यूँ न हम कोई हंसी ख्वाब सजाले अपने ज़िन्दगी के लिए
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे हर सपनो की आँखों मे
देते है उन्हें उड़ान एक मंज़िल की खुद आगाज़ करते है
भले ही तुम्हे कोई न समझें पर हम अच्छी तरह वाकिफ है
सह लेता है हर जख्म जाने कैसा तू ज़िन्दगी मे मुसाफिर है
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे हर मुश्कान की
ए दिल क्यूँ न गम मे भी हँसने की फैसला हम कर लेते है
अब तक सबसे छुपा कर रखा जो आज बोल देते है
राज़ बहुत गहरा जो कुछ लफ़्ज़ों मे हर राज़ खोल देते है
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे इश्क़ की इस दिल के
अब उस हर अहसास को धड़कन ने महसूस कराया है
ए दिल अब चुप न रहो अपनी चाहत का इज़हार कर दो
गर है मोहब्बत अपने सनम से तो आज उनसे बयां कर दो
वो खिड़की जो बंद रहती है तेरे अल्फाज़ो के कमरे की
आजा नैना आज भरे महफिल मे उसे मोहब्बत-ए -ग़ज़ल का नाम देते है….!!
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नैना…. ✍️✍️
