मुस्कुराना उनका काम है
जो फूलो सी खिली रहती है 
मेरे दिल का धड़कन पता है उनकी
जो हर सांस के साथ धड़कती है
कोई कहता है हूर, कोई कहें या परी कोई 
दुनिया जिस नाम से भी जाने यारों
परवाह नहीं
बस इतना जानते हम…..
वो देवी है हमारी मनमंदिर की
जिन्हे हर सांस के साथ हम पूजा करते है
      इतना बोलकर सुमित होठों पे मुस्कुराहट लिए आँखे बंद कर लिया। लेकिन कब से ध्यान लगा सून रहे दोनों दोस्तों की मूड चढ़ गया। क्योकि वो मुश्कान की पता जानने के लिए कान लगाए थे और सुमित कहाँ एक शायरी जड़ दिया। जिससे दोनों को समझ नहीं आरहा था की तारीफ़ करें या सुमित की धुनाई 😁। कुछ देर बाद कुछ आवाज न पाकर सुमित ने आँखे खोला तो राज और मोहन को खुद को गुस्से मे घूरते पाया।आग मे घी जैसे हुआ सुमित का ये पूछना की( क्या हुआ, ऐसे क्यूँ देख रहे हो?)राज सुमित के तरफ लपकते हुए
राज -oyye देवदास हमने न तुमसे शायरी सुनाने को नहीं बोला था ok। हर रोज़ हमारा सर खरहा है न। तू रुक आज बताता हूँ तुम्हे की क्या हुआ।
सुमित -अरे यार हुआ क्या ये तो बता…?
मोहन -तू हमें समझता क्या है पहले ये बता…।
सुमित -अच्छे और सच्चे दोस्त हो यार। लेकिन अब क्यूँ कमीनेपन पे उतर रहे हो। इतना कहते हुए सुमित वहासे भागते हुआ।राज उसके पीछे भागते हुए
राज -सही कहाँ आज तो सच मे हमारे कमीनेपन देखेगा। साले… जब तक बताएगा नहीं तो ढूड़ेगे कैसे तुम्हारी देवी को..?
सुमित -अपना सर पकड़ते हुए.. अरे यार पहले मुझे तो पता चले की कहाँ रहती है। इतना सून कर दोनों जहाँ थे वही रुक गए। और एक साथ ही
क्या….
मोहन -तुम्हे नहीं पता की क्या मतलब है..?
सुमित -कसम से यारों मैं नहीं जानता।ज़ब से देखा है तब से आज दूसरी बार तो देखा है बस। इसीलिए जो पता मुझे पता था वही बताया इसमें क्या दोष है मेरा बोलो तुम दोनो ही।
राज -हद है यार…. 🙆‍♂️🤦‍♂️।अब तो कल से साइड का काम भी शुरू होगया। जितना भी वक़्त है वो आज भर का ही है।
मोहन -ऐसा क्यूँ भाई…?
सुमित -ऑफिस मे चल तुम्हे भी सब पता चल जायेगा।
राज -और तुम्हे कोई फर्क नहीं पढ रहा क्यूँ..?
सुमित -फर्क पढ़ता है भाई। लेकिन ये भी है जो भी होगा अच्छे के लिए होगा। गर लिखा होगा मुझे मेरी मंज़िल से मिलना तो आज कुछ गलत नहीं होगा। क्योकि जो बात मेरी देवी से जुड़ी होती है। वो सब सही होता है इसीलिए टेंशन नहीं है कुछ।
राज -तेरा सही है भाई। विंदास होकर भी किसी के इश्क़ मे कैद है। और कोई टेंशन नहीं है वाह 👌👌
सुमित -यही तो ज़िन्दगी होता है मेरे दोस्त 😊। अब चले..?
मोहन और राज -हाँ चल 😊😊
 
        आश्रम के आँगन मे खेलते कुछ बच्चो को ध्यान से देखते हुए मुश्कान एक जगह दिवार से सर टिका कर कहीं खोयी सी बैठी थीं। चहरे पर कोई भाव नहीं बिलकुल शांत… जैसे उसके दिल और दिमाग़ दोनों ही स्थिर होचुका है। ऊसे इस तरह से कब से देख रही आरती को अब रहा नहीं गया तो पीहू को राधिका के पास छोड़ कर मुश्कान के पास आकर बैठ गयीं। और वो भी बच्चो को देखते हुए
आरती -क्या बात है मुश्कान….? कहाँ खोयी हो कब से,कुछ हुआ है क्या…?बिना कोई भाव के मुश्कान उसी तरह
मुश्कान -नहीं…।
आरती -मैं नहीं मानती। या हमसे share करना नहीं चाहती हो कुछ…।
मुश्कान -नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है। मेरी life मे क्या क्या होरहा है और क्या नहीं सब तुम दोनों को पता है। और तुम छुपाने की बात कर रही हो…। तुम भी न 🤦‍♀️
आरती -हाँ पता है इसीलिए पूछ रही हूँ। और कब से देख भी रही हूँ की कहीं खोयी हुई है बिलकुल। कुछ देर पहले तो हम दोनों से ज्यादा ख़ुश थीं पर अब ऐसे क्यूँ…?
मुश्कान -पता नहीं यार…। लगता है फिर कुछ होने वाला है मेरे साथ। दिल और दिमाग़ दोनों शून्य होचुका है। कुछ तो बीतने वाला है फिर मुझपे…।
आरती -चुप पागल…। नेगटिव मत सोच तुम ज़ब ज़ब ऐसी बाते करती है जरूर कुछ होता है। इसीलिए डर भी लगता है। तू न कभी एकेले न रहा करो। देख जो होना था वो होगया अब हमारे सामने एक खास दुनिया है जिसे हमें अपने हाथो से सजाना होगा। (आरती इतना बच्चो के तरफ इशारा करके कहाँ )
मुश्कान -सही कहाँ तुमने जो होना था वो होगया अब हमारा फ्यूचर इस खास दुनिया मे है।
आरती -तो चल अपनी नाम की बेज़्ज़ती न कराओ और मेरी सहेली की होठों पर खिल जाओ मुश्कान…(मुश्कान मुस्कुराते हुए )
मुश्कान -पागल कहीं की…. 😊
राधिका पीछे से हग करते हुए -यही तो निशानी है जान मेरी हमारी दोस्ताना का 🤗🤗
आरती -हाँ बिलकुल…
मुश्कान -तो दूर क्यूँ खड़ी आजाओ एक जगह खाली है 🤗🤗इतना सुनकर आरती भी मुश्कान से आकर लिपट गयीं। 🤗अपनी ऑफिस की खिड़की से देख रही पूजा मैम मुस्कुराते हुए अपनी चेयर से उठ कर तीनो सहेलियों के पास आते हुए
पूजा मैम -very good dears ऐसे ही हमेशा रहना आप तीनो, गर कोई एक कमजोर पढ़े तो एक दूसरे की हिम्मत बनना पर कभी एक दूसरे की साथ मत छोड़ना चाहे जो भी हो। इतना सून कर तीनो ने हाँ मे सर हिला दिया। मुश्कान अपनी हाथ की घड़ी देखते हुए चौक कर बोली
मुश्कान -मर गयीं… 🙆‍♀️
पूजा मैम -क्या हुआ मुश्कान ऐसे क्यूँ बोल रही हो आप..?
मुश्कान -मैम आज घर जल्दी जाना था। गेस्ट आने वाले है शाम को। और मैं भूल गयीं 🤦‍♀️
पूजा मैम -हम समझें नहीं।
आरती -वो आज कुसुम दी को देखने वाले आने को है। है न मुश्कान…?
मुश्कान -हाँ 🤦‍♀️🤦‍♀️कहीं मुझसे पहले वो लोग न पहुंच जाए। अगर ऐसा हुआ तो अच्छा नहीं होगा yr. 🙆‍♀️
पूजा -कोई बात नहीं आप जाओ जल्दी ही गर ऐसी बात है तो। आरती और राधिका… आप दोनों भी जाओ कल से आप तीनो की ज़िम्मेदारी और बढ़ रही है तो आज घर पर कुछ वक़्त बिता लीजिएँ। तीनो हाँ मे सर हिलाते हुए अपनी अपनी केबिन की तरफ चल दी और कुछ ही देर के बाद तीनो बस स्टॉप पर खड़ी बस का वेट करने लगी।
   यहाँ सुमित भी अपने दोस्तों के साथ ऑफिस से बाहर आया।पीछे मुड़कर देखा तो राज और मोहन दोनों की चेहरा उतरा हुआ पाया। उनके कंधो पर हाथ रखते हुए
सुमित -क्यूँ चेहरा उतरा है मेरे दोनों भाईयो की..?
मोहन -यार तुम्हे कुछ फर्क नहीं पढ़ता क्या..? अभी से साइड के लिए निकलना है। वो भी तीनो को अलग अलग.. 🙍‍♂️
राज -कोई नया बात थोड़ी न है। है न सुमित…?
सुमित -पागल हो क्या तुम दोनों। भाई ये हमारा काम है। तो करना ही है। इसीलिए उदास नहीं होना है। और वैसे भी तुम्हारे चहरे पर ये मायूसी नहीं जजती। तुम दोनों हमेशा मस्ती करते हुए ही अच्छे लगते हो। तो चलो हम मिलते है अपने अपने साइड से लौट कर।
मोहन -ok but तुम अपनी मंज़िल के तलाश मे भी रहना हम भी तुम्हे ऐसे तड़पते नहीं देख पारहे है अब…।
सुमित -बिलकुल भाई अब मुझे भी लगता है। उनसे ज्यादा दूर नहीं हूँ अब। मेरा दिल कहता है जल्दी ही अपनी देवी से हकीकत मे मिलेंगे हम
राज -ऐसा ही हो मेरे भाई मेरा आशीर्वाद है तुम्हे 🙌🤭
मोहन -मेरा भी.. 😂😂
सुमित -हाँ अब लग रहे हो मेरे कमीने दोस्त 😜चलो अब देर होरही है। वरना रात होजायेगी तुम दोनों को जाते जाते।
राज -तुम नहीं जारहे हो क्या आज..?
सुमित -नहीं मुझे दो या तीन दिन लग जायेगे इसी शहर मे। एक एंजिओ के पास टावर की कनेक्शन सेट करना है तो दो दिन बाद ही दूसरे जगह जापाऊंगा।
राज -यार लेकिन अभी तक हमारी साइड की लोकेशन नहीं मिला।
सुमित -वो मिल जायेगे कुछ देर मे तब तक हम निकलते है।मोहन सुमित और राज को गले लगाते हुए
मोहन -चलो अब मिलते है हफ्तों बाद 🤗🤗
सुमित -हाँ लेकिन जिस तरह अभी हँसते हुए जारहे है वैसे ही मिलेंगे भी। तो कोई उदास नहीं होगा ok..?दोनों ने हाँ कहाँ और अपने अपने कार मे बैठ कर अपने अपने मंज़िल की ओर निकल गए और सुमित अपने घर की ओर कार दौड़ा दी। लेकिन उसकी नज़रे किसी को ढूंढ़ने मे लगी हुई थीं। तभी ट्रैफिक लाइट रेड सिग्नल होगया इत्तफाक से उसी बस स्टॉप पर जहाँ तीनो सहेलियां खड़ी थीं। अचानक से सुमित के दिल जोर से धड़कने लगा तो वो बेचैनी से कार के कांच निचे किया और हर तरफ देखने लगा। तभी उसकी नज़र रोड उस पार खड़ी मुश्कान पर जा रुकी। जिससे वो अपने दिल पे एक हाथ रख कर कहाँ…
      आप इस दिल मे हो आज पूरा यकीं होगया जान… तभी तो अपने आसपास होने की खबर दें दी हमें।तभी देखा की मुश्कान अपने सहेलियों के साथ एक बस पर चढ़ गयीं। तो वो खुद से कहाँ चल सुमित आज पता कर ही ले की कहाँ रहती है तुम्हारी प्यारी देवी…। तब तक सिग्नल ग्रीन होगया और सुमित अपनी कार उस बस के पीछा लेलिया जिसपर मुश्कान चढ़ी थीं।लग भग 20 मिनट बाद बस रुकी और कुछ लोग उतरे उनके पीछे ये तीनो भी उतर गयीं। और हँसते मज़ाक करते हुए ही तीनो पैदल ही एक गली के तरफ मूड गयीं। सुमित तो मुश्कान के हँसते हुए देख कर भूल ही गया की वो क्या करने आया था। उसे देखते देखते ही तीनो सहेलियां कहीं गुम होगयी सुमित के आँखों के सामने से जिससे वो फिर उदास होगया। फिर कुछ सोचा मन मे फिर उस गली को ध्यान से देखा और मुस्कुराते हुए घर के तरफ चल दिया…।
क्रमशः :देखते है कब तक ऐसे पीछा करता है सुमित अपने मंज़िल को….
नैना… ✍️✍️
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