मेरे जीवन साथी इस रिश्ते को बयां कैसे करूं अरदास यही है मौत आये,तो तेरी बाहों में मरूँ
सारे रिश्ते तो रिश्तेदार हो गए
सभी अपने अपनो में खो गए
सबकुछ जो मुझ पर न्यौछावर कर दे
वो सिर्फ तुम ही हो।
सब तो किसी मतलब से साथ होंगे
प्यार तो करेंगे पर उसके भी दाम होंगे
जो बेमतलब ही मुझ पर प्यार लुटा दे
वो सिर्फ तुम ही हो।
बाकी के हर रिश्ते में सिर्फ प्यार होगा
मनमुटाव में जीत उनकी, मेरा हार होगा
जिस पर गुस्सा होऊं, हक़ से लड़ झगड़ सकूँ
वो सिर्फ तुम ही हो।
सुख दुख गम ख़ुशी जीवन मे जब भी आएंगी
सारे रिश्तें नाते दो पल साथ निभा चली जाएंगी
पर जो निःस्वार्थ भाव से साथ मेरा देगा
वो सिर्फ तुम ही हो
मेरे जीवनसाथी इस रिश्ते को कैसे बयां करूं
अरदास यही है मौत आये तो, तेरी बाहों में मरूं
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थ्रीमा विनोद साहू

