आयो है फाल्गुन करो धमाल,
नाचें गायें फाग बजाएं ताल।।
ढोल मंजीरा और बजाएं नाल,
सब को करन है पीला लाल।।
कान्हा संग झूमत ग्वाल बाल,
गली-2 में शोर मचायें ग्वाल।।
रंग लिए नीले पीले हरा लाल,
एक दूजे पे रंग डाल गुलाल।।
गोपियाँ खेलें होली रंग डाल,
राधा के लगाय रह्यो गुलाल।।
होली खेल रह्यो जी नंदलाल,
मचायो ब्रिज में बड़ो धमाल।।
खेलें होलिया फूलों को डाल,
राधा कान्हा सब ग्वाल बाल।।
रंगरसिया दीन्हों ऐसे रंग डाल,
राधा के होगए गाल हैं लाल।।
खेलें होलिया लठमार ले ढाल,
गोपियाँ मारे लठ थामें ग्वाल।।
नाचें थिरकें उछलें करे धमाल,
सड़कें मथुरा की होगई लाल।।
खेलत मस्ती में देखो नंदलाल,
होरियारों की टोली का जाल।।
उड़ाय रह्यो रंगा बिरंगा गुलाल,
डार रह्यो खूब अबीर गुलाल।।
कोई पहचान में न आये ग्वाल,
ऐसो रंगयो हरेक गोपी ग्वाल।।
होली है भाई होली है रंग डाल,
रंगरसिया बन्यो कन्हैयालाल।।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
