हम यहाँ यही समझने और समझाने आए हैं कि होली जैसे अनुपम त्योहार का हमारी हिंदू संस्कृति में क्या महत्त्व है?
तो सबसे पहले तो यह समझ लीजिए कि यह पर्व सामाजिक प्रेम-व्यापार, भ्रातृत्व-भाव, मेल-मिलाप का ऐसा अनूठा पर्व है जैसा दूजा नहीं है।यह समाज गत बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय को भी दर्शाता है जैसा कि हमारे पौराणिक ग्रन्थों, किस्से कहानियों और किंवदंतियों में मिलता है।जिसके विस्तार में न जाकर मैं अपने शब्दों में होली का विवेचन करना चाहती हूँ। 
•होली का त्योहार मुख्य रूप से हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है और इसका इतिहास सदियों पुराना है। होली का त्योहार मुख्य रूप से रंगों का त्योहार होता है और इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व है। होली दो दिनों तक मनाई जाती है जिसमें पहले दिन होलिका दहन होता है जिसे छोटी होली भी कहा जाता है और दूसरे दिन रंगों का त्योहार होता है जिसमें लोग मिल जुलकर रंग खेलते हैं और खुशियां मनाते हैं। पानी के गुब्बारों और पिचकारी से बहुत पहले से ही होली खेलने का चलन चला आ रहा है। बहुत पहले होली केवल हिन्दू धर्म का त्योहार था लेकिन अब ये दुनिया भर में एक उत्सव की तरह मनाया जाता है।
• होली का सांस्कृतिक महत्व -:   होली से जुड़े विभिन्न किंवदंतियों का उत्सव लोगों को सच्चाई की शक्ति के बारे में आश्वस्त करता है क्योंकि इन सभी किंवदंतियों का  बुराई पर अच्छाई की अंतिम जीत है। हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा भी इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि भगवान की अत्यधिक भक्ति उसका प्रतिदान करती है क्योंकि भगवान हमेशा अपने सच्चे भक्त को अपनी शरण में लेते हैं। यह भावना सभी लोगों को अपने जीवन में एक अच्छे आचरण का पालन करने और सच्चे होने के गुण में विश्वास करने में मदद करती हैं। होली लोगों को सच्चे और ईमानदार होने के गुण में विश्वास करने और बुराई से लड़ने में मदद करती है। इसके अलावा, होली साल के ऐसे समय में मनाई जाती है जब खेत पूरी तरह खिलखिला उठते हैं और लोग अच्छी फसल की उम्मीद करते हैं। यह लोगों को होली की भावना में आनंदित होने, आनंद लेने और खुद को डुबा देने का एक अच्छा कारण देता है।
• अवसाद में भी हर्ष का उन्माद   है  होली ।विगत में भी आगत का सम्मान है होली ।
खटास में मिठास का रंग-दान है होली। मन-भेद में भी प्रेम का
परवान है होली। सदियाँ गुजर गयीं अब भी,जवान है होली। इतना ही नहीं कुछ और भी सुनो – जब घर रंगे जाएं तो दीपावली ओर जब घरवाले रंगे जाएं तो होली।जब घर में दीपक जलाए जाएं 
तो दीपावली और जब बाहर चौक में अग्नि जलाएं तो होली। एक में अग्नि (प्रकाश) है ,एक में जल है। दीपावली भगवान का त्यौहार है,तो होली भक्त का त्यौहार है। जब बाहर रोशनी हो तो दीपावली और जब अन्तर्मन में रोशनी हो तो होली है। रंगों का अनूठा पर्व आपके जीवन में गतिमयता, हरियाली, सरसता और समृद्धि का संचार करे। अन्ततः मेरी शुभकामनाएँ इस पर्व को लेकर समग्र समाज के लिए है और अभिलाषा है कि यह भावनाएँ उत्तरोत्तर बढ़ती रहें। 
धन्यवाद!
लेखिका- सुषमा श्रीवास्तव 
मौलिक रचना,सर्वाधिकार सुरक्षित, 
उत्तराखंड।
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