अभी इन दिनों एक माननीय बहुत चर्चित हैं । वैसे त़ो माननीय हमेशा ही चर्चा में रहते हैं । शायद चर्चा में रहने के लिए ही माननीय बनते हैं । पता नहीं सही स्थिति क्या है ? माननीय हैं इसलिए चर्चा में रहते हैं या चर्चा में रहने के लिए माननीय बनते हैं । पर जो भी हो महिलाओं के लिए इनके दिल के भाव समय समय पर उछल उछल कर बाहर आते रहते हैं । एक बार एक माननीय ने अपनी पार्टी की एक महिला नेत्री को “टंच माल” कहा था । और वे महानुभाव उस बयान पर शर्म करने के बजाय यह कहते रहे कि मैंने तो उनकी प्रशंसा की है । उससे भी अधिक ताज्जुब की बात यह है कि ऐसे माननीय की पार्टी की अध्यक्ष एक महिला ही हैं । जो लोग यह कहते हैं कि महिला को ये बना दो तो महिलाओं के प्रति सम्मान बढ़ जायेगा । इस पार्टी की अध्यक्ष एक महिला ही हैं जो विगत बीस बाइस सालों से अध्यक्ष हैं । हां , बीच में कुछ दिन अपने युवराज को यह गद्दी सौंप दी थी मगर युवराज ने उसे कांटों का ताज समझ कर उतार कर फेंक दिया ।
इसी तरह एक और माननीय ने पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त एक अभिनेत्री को “हरामखोर” कह दिया । और उस पर तुर्रा यह कि वे माननीय बड़ी बेशर्मी से कहते रहे कि “हरामखोर” का अंग्रेजी अर्थ “नॉटी” होता है । हरामखोर शब्द का अंग्रेजी अनुवाद सुनकर हम तो धन्य हो गए और उस दिन के बाद से हम तो उन माननीय को भी नॉटी ही कहने लगे ।
एक लाल टोपी वाली पार्टी के मुखिया जिन्होंने वह पार्टी बनाई थी ने कभी एक बार सार्वजनिक मंच से कहा था कि “लड़के हैं लड़कों से गलती हो जाती हैं । इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि लड़कों को फांसी पर चढ़ा दो “। सच में ऐसे ऐसे बयान सुनकर आनंद आ जाता है । हमें महसूस होता है कि हमने कितने अच्छे, संस्कारवान, शिक्षित, सभ्य, ज्ञानवान माननीय चुने ।
अभी कर्नाटक विधानसभा में एक माननीय ने बलात्कार के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा था कि बलात्कार तो होते रहते हैं । बलात्कारों को रोका जाना संभव नहीं । अगर कोई लड़की ऐसी स्थिति में फंस जाये तो उसे विरोध कर अपनी जान गंवाने के बजाय नीचे लेट जाना चाहिए और बलात्कार को एंजॉय करना चाहिए । यह ब्रह्मवाणी सुनकर तबीयत प्रसन्न हो गई । मजा तो तब आया जब उस माननीय की पार्टी की अध्यक्ष ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । और तो और यू पी में दर दर टी ठोकर खाने वाली पिंकी जो महिला सम्मान के लिये नौटंकी पे नौटंकी किये जा रही है, वह भी चुप्पी साध गई । पूरी लेफ्ट बिरादरी, लिबरल्स, बॉलिवुड की तथाकथित अदाकाराएं , नारीवादी संगठन सब चुप हैं । क्योंकि माननीय ऐसे दल से हैं जिनकी गुलामी मीडिया, लिबरल्स, बॉलीवुड , बुद्धिजीवी करते हैं ।
ऐसा नहीं है कि इसमें दोषी एक ही राजनीतिक दल हो । विधानसभा के अध्यक्ष के साथ साथ अन्य सदस्य भी माननीय के बयान पर हंस रहे थे । आज पूरा देश इन पर हंस रहा है और जनता खुद पर थूक रही है कि ऐसे लोगों को उसने माननीय बना दिया है । पर अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ? इसलिए अपना वोट बहुत ही अनमोल है । इसे ऐसे लोगों पर बर्बाद मत करो । महिलाओं का सम्मान करने वाले नेताओं को मत चुनो । अब ये जनत जनार्दन तय करे कि उसे रावण चाहिए या राम ।
हरिशंकर गोयल “हरि”
