ख्वाहिश है कि मेरी जिंदगी में एक दिन वो मुकाम आए,
मेरे हिस्से में मेरी सफलता का आसमान आए।
बहुत किस्से बने जिंदगी में, कई किरदार हैं मैंने निभाए
बस अब कोशिश है कि
इन सबसे अलग खुद की एक पहचान बनायी जाए।
छोड़ दिया बेवजह सबको अपनी तकलीफ बताना,
छोड़ दिया अपने अहसासों को उनके सामने जताना।
क्यों न अब अपने हर दर्द, हर अहसास को कागज पर उतार दिया जाए …
क्यूं न जज्बात की स्याही से अपने ख्वाबों को अब हकीकत में तब्दील किया जाए ?
मेहनत इतनी करूंगी कि लोग जब मिलें तो कहें…
‘ यह वो रचना नहीं जिसे हम जानते थे , यह तो लगे है कोई और ‘
खामोश रहूंगी , कुछ न कहूंगी क्यूंकि अब मेरी सफलता ही हर तरफ मचाएगी शोर।
सफलता की तरफ अब एक-एक कदम मैं बढ़ाने लगी हूं,
अब तक आजमाते थे लोग मुझे , अब मैं खुद ही खुद को आजमाने लगी हूं।
देखती हूं आखिर कब तक गिरना है मुझे ?
जरूरत नहीं मुझे अब किसी के सहारे क्योंकि जानती हूं गिरकर खुद ही संभलना है मुझे।
हां माना कि इस राह में बहुत अड़चनें हैं ,
मुमकिन है इनमें उलझकर मैं बार-बार गिरुंगी …
लेकिन जब गिरुंगी तभी तो दोबारा दोगुनी मेहनत लगाकर ऊपर उठूंगी।
कब तक खींचेंगे लोग मुझे पीछे अब मैं खुद को हारने नहीं दे सकती
हासिल करना है मुझे मेरी सफलता का आसमान,
संघर्ष मंजूर है मुझे मगर एक कमजोर लड़की का खिताब मैं नहीं ले सकती।
:- रचना राठौर ✍️
