हां … दीवारें भी सुनती है
छुप छुप कर दूसरों की बातें
कब?
जब खड़ी हो जाती है दो लोगों के बीच
नफ़रत और वैमनस्य की दीवार
स्नेह बदल जाता है द्वेष भावना में
तब उनके हिस्से की दीवारें बन जाती हैं
एक दूसरे की हर बात की मुखबिर
चुपके चुपके कान लगाए सुनती हुई
अच्छाइयों को भूलकर बुराइयां तलाशती
अपने दिलों में कटुता के बीज बोती
ये निर्जीव दीवारें बन जाती हैं सजीव मूर्ति
सीमेंट बालू के मिश्रण से तैयार
पत्थर बनी हुई खिंची हुई ये दीवार
संगीता शर्मा
