कभी किसी को ना देना धोखा,
किसी से करना कोई घात नहीं।
इंसानियत व धर्म यही कहता है,
बुरे जो मानव उसकी जात नहीं।
हरेक धर्म हमें सद्कर्म सिखाता,
इससे सुन्दर तो कोई बात नहीं।
फिर क्यों धर्म की राह छोड़ते हैं,
करते हैं वही जो ठीक बात नहीं।
कहाँ लिखा है झगड़ो मारो काटो,
किसी धर्म में लिखी ये बात नहीं।
इंसा से इंसा का प्रेम का नाता हो,
कोई अनादर की कोई बात नहीं।
छल कपट एवं ये धोखा बेईमानी,
किसी के संग में अच्छी बात नहीं।
धर्म कर्म इंसानियत एवं मानवता,
सब खत्म हुईहै अच्छी बात नहीं।
बुरे कर्म का सदा बुरा ही नतीजा,
यही तो सच है ये झूठी बात नहीं।
करनी का फल है सबको मिलता,
फिर भी क्यों खुलती आँख नहीं।
जब सब कुछ यह लुट ही जायेगा,
तबजो खुली तो वो है आँख नहीं।
छोड़ रार प्रेम भाईचारा अपनाओ,
इससे सुंदर तो कोई भी बात नहीं।
इस देश से सुंदर जग में न कोई है,
अन्य देशों में हिन्द जैसे बात नहीं।
प्रेम करो भारत की धरती मिट्टी से,
इसमें परायेपन की कोई बात नहीं।
गंगा जमुनी तहजीब यहीं बसती है,
अमन चैन न है ऐसे कोई बात नहीं।
जिओ और जीने दो हमें शांति संग,
सदैव अशांति हो ये कोई बात नहीं।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
